
कान्हा गौशाला की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल, तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर किया निरीक्षण
चारा-पानी और साफ-सफाई को लेकर शिव शक्ति अखाड़ा के कार्यकर्ताओं ने जताई नाराजगी, जांच और कार्रवाई की मांग
सिकंदरा, कानपुर देहात। सिकंदरा नगर पंचायत क्षेत्र के जटियापुर स्थित कान्हा गौशाला की व्यवस्थाओं को लेकर शिव शक्ति अखाड़ा के कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। गोवंशों के लिए पर्याप्त चारा, भूसा-चोकर और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं होने का आरोप लगाते हुए कार्यकर्ताओं ने मामले की जानकारी अधिकारियों को दी। शिकायत के बाद तहसीलदार मौके पर पहुंचीं और गौशाला का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि गौशाला में गोवंशों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है। लंबे समय से पानी की सफाई नहीं होने के कारण उसमें काई और कीड़े दिखाई दे रहे हैं। निरीक्षण के दौरान एक गोवंश मृत अवस्था में मिलने के बाद उसके निस्तारण को लेकर भी सवाल खड़े किए गए। कार्यकर्ताओं ने मृत गोवंश के सम्मानजनक एवं निर्धारित प्रक्रिया के तहत निस्तारण की मांग की।
मामले की जानकारी जिलाधिकारी को दिए जाने के बाद तहसीलदार गौशाला पहुंचीं। उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों से बातचीत कर उनकी शिकायतें सुनीं और गौशाला की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। शिव शक्ति अखाड़ा के कार्यकर्ताओं ने अधिकारियों के सामने चारा, पानी, साफ-सफाई और गोवंशों की देखभाल से संबंधित समस्याएं रखीं। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि गौशाला से जुड़े कुछ कर्मचारी शिकायत लेकर पहुंचने वाले लोगों के साथ अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज करते हैं। वहीं नगर पंचायत के कुछ सभासदों ने भी गौशाला की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए तत्काल सुधार की मांग की।
शिव शक्ति अखाड़ा के कार्यकर्ताओं ने कहा कि गोवंश संरक्षण केवल सरकारी व्यवस्था नहीं, बल्कि प्रशासन और समाज की साझा जिम्मेदारी है। गौशाला में पर्याप्त चारा, स्वच्छ पानी, नियमित साफ-सफाई और गोवंशों की समुचित देखभाल सुनिश्चित की जानी चाहिए। संगठन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गोवंश संरक्षण को लेकर दिए गए निर्देशों का जमीनी स्तर पर प्रभावी अनुपालन कराने की मांग की।
अखाड़े ने जिलाधिकारी और संबंधित विभागीय अधिकारियों से गौशाला की व्यवस्थाओं की विस्तृत जांच कराने, स्वच्छ पेयजल एवं पर्याप्त चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने, नियमित सफाई कराने तथा मृत गोवंश के नियमानुसार सम्मानजनक निस्तार