ये शिलालेख जोधपुर की विरासत की कहानी है।
प्रताप सागर
निर्माण : 1892 ई
निर्माता: H.H. महाराजाधीराज जनरल सर प्रताप सिंह जी साहिब बहादुर, G.C.S.I., G.C.V.O., G.C.B., LL.D, A.D.C
उद्देश्य : जोधपुर की जलापूर्ति के लिए।
तत्कालीन शुरुआती खर्च : 65,000 रुपए जो उस समय महाराजा ने काम शुरू होते ही दे दिए थे।
सर प्रताप सिंह जी जोधपुर के महाराजा रीजेंट भी थे और "Imperial Majesty" के A.D.C यानी सहायक-डी-कैंप भी। वो योद्धा के साथ-साथ दूरदर्शी शासक भी थे। 1892 में 65,000 रुपए लगाना मतलब आज के करोड़ों के बराबर।
प्रताप सागर आज भी जोधपुर की प्यास बुझाने में मदद करता है। 130 वर्ष से भी अधिक पुराना स्ट्रक्चर है और पत्थर पर लिखा हर शब्द आज भी साफ दिख रहा है।
लेकिन इसकी होती दुर्दशा प्रशासनिक अधिकारियों को नही दिख रही।
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