
डॉ. राजेश्वर कुमार की पुस्तक "इंडिया नहीं भारत" चर्चा के केंद्र में
मुजफ्फरपुर। डॉ. राजेश्वर कुमार और डॉ. मोतीलाल गुप्ता द्वारा लिखित पुस्तक "इंडिया नहीं भारत" इन दिनों व्यापक चर्चा का विषय बनी हुई है। हाल ही में द्रौपदी मुर्मू ने जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में ‘इंडिया’ के स्थान पर ‘भारत’ शब्द के प्रयोग को बढ़ावा देने वाली विश्वविद्यालयों की पहल की सराहना की, जिसके बाद इस पुस्तक की चर्चा और तेज हो गई है।
डॉ. राजेश्वर कुमार, जो भारतीय भाषा मंच के राष्ट्रीय संयोजक हैं, लंबे समय से “देश का नाम भारत” अभियान का संचालन कर रहे हैं। इस अभियान में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास और भारतीय भाषा मंच की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अभियान के तहत देशभर के लाखों लोगों ने ‘इंडिया’ के स्थान पर ‘भारत’ शब्द के प्रयोग का समर्थन किया है।
पुस्तक "इंडिया नहीं भारत" में भारत नाम की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भाषाई सार्थकता पर शोधपरक दृष्टि से विचार किया गया है। डॉ. राजेश्वर कुमार के अनुसार, भारत आज औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और ऐसे समय में ‘भारत’ शब्द का व्यापक प्रयोग एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कदम है।
उल्लेखनीय है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान भी ‘इंडिया’ के स्थान पर ‘भारत’ शब्द के प्रयोग को प्रमुखता मिली थी। इस विचार का समर्थन मोहन भागवत तथा दत्तात्रेय होसबोले ने भी किया है।
डॉ. राजेश्वर कुमार की इस उपलब्धि पर दिनेशचंद्र राय, समीर शर्मा, कनुप्रिया, ललित किशोर, अमर बहादुर शुक्ला तथा रजनीश गुप्ता सहित अनेक शिक्षाविदों ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
Bihar, India | Jun 21, 2026