
राजधानी शिमला में दक्षिण-पश्चिम मानसून की पहली तेज बारिश के साथ ही मंगलवार को बड़ा भूस्खलन देखने को मिला। दोपहर बाद हुई बारिश के कुछ समय बाद शिमला-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग के बैरियर क्षेत्र में पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया, जिससे भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें सड़क पर आ गिरीं। इसके कारण शिमला-चक्कर मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। राहत की बात यह रही कि हादसे के दौरान कोई वाहन मलबे की चपेट में नहीं आया और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं तथा जेसीबी मशीनों की सहायता से सड़क से मलबा हटाने का कार्य शुरू किया गया, जो देर शाम तक जारी रहा।
भूस्खलन का असर पास से गुजरने वाले शिमला-कालका राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी पड़ा। सुरक्षा कारणों से वाहनों की आवाजाही धीमी कर दी गई, जिससे दोनों ओर लंबा जाम लग गया और लोगों को काफी देर तक परेशानी झेलनी पड़ी। यातायात सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिस ने वाहनों को वैकल्पिक बालूगंज मार्ग की ओर मोड़ दिया, जिसके बाद हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे। मानसून के आगमन के साथ प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन की आशंका बढ़ गई है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और संवेदनशील क्षेत्रों में पूरी सावधानी बरतने की अपील की है।