Public App Logo
Profile Picture

Kalka Pinjore News

@kalkapinjorenews
13Followers
0Following
माता मनसा देवी मंदिर में पंचकूला टूरिस्ट पुलिस पोस्ट की शुरुआत के 24 घंटे के अंदर हिमाचल, चंडीगढ़, पंजाब और यूपी से आए 7 परिवारों को मिली राहत, अपनों से बिछड़े 6 बच्चें व 1 महिला को पुलिस ने परिवारों से मिलवाया 

पुलिस कमिश्नर पंकज नैन बोले- टूरिस्ट पुलिस पोस्ट की अलग वर्दी से श्रद्धालुओं के लिए पुलिस तक पहुंचना हुआ और आसान, टीम द्वारा बिछड़े बच्चों व महिला को  सकुशल मिलवाना सराहनीय

पंचकूला/ 12 अक्टूबर:- शारदीय नवरात्र के अवसर पर माता मनसा देवी मंदिर में देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। मेले में उमड़ रही भीड़ के बीच बच्चों का परिजनों से बिछड़ जाना परिवारों के लिए चिंता का कारण बन सकता है। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सहायता के लिए मंदिर परिसर में स्थापित हरियाणा की पहली टूरिस्ट पुलिस पोस्ट ने अपनी उपयोगिता साबित करते हुए महज 24 घंटे के भीतर 7 बिछड़ों को सकुशल उनके परिजनों से मिलवाया जिनमें 6 छोटे बच्चे शामिल है। पुलिस टीम ने सूचना मिलते ही सक्रियता दिखाते हुए तकनीक, लाउडस्पीकर से उद्घोषणा और त्वरित खोजबीन के माध्यम से बच्चों को तलाशकर उनके परिजनों तक पहुंचाया।
मुख्यमंत्री हरियाणा नायब सिंह सैनी ने 11 अक्टूबर को ही माता मनसा देवी मंदिर परिसर में स्थापित हरियाणा की पहली टूरिस्ट पुलिस पोस्ट का उद्घाटन किया 

डीसीपी पंचकूला आईपीएस अदिति सिंह के अनुसार पहले मामले में 11 अक्टूबर की रात करीब नौ बजे हिमाचल प्रदेश से माता के दर्शन करने आए एक परिवार की दो वर्षीय बच्ची के बिछड़ने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही टूरिस्ट पुलिस पोस्ट की टीम ने तुरंत तलाश शुरू की और बच्ची को सकुशल उसके परिजनों से मिलवा दिया। बाकि सभी मामलें आज ही के है जिसमें दूसरे मामले में चंडीगढ़ से आए एक परिवार की पांच वर्षीय बच्ची मंदिर परिसर में परिजनों से बिछड़ गई। पुलिस टीम ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए बच्ची को तलाशकर परिवार के सुपुर्द किया। तीसरे मामले में पंजाब से दर्शन करने आए परिवार का दो वर्षीय बच्चा मेले में बिछड़ गया, जिसे पुलिस टीम ने खोजकर सकुशल परिजनों से मिलवा दिया। चौथे मामले में उत्तर प्रदेश से आए परिवार की आठ वर्षीय बच्ची के बिछड़ने की सूचना पर टूरिस्ट पुलिस पोस्ट ने तत्काल कार्रवाई की और बच्ची को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाया। पांचवें मालमें में अभयपुर में रहने वाले एक परिवार माता के दर्शन करने पहुंचा इसी दौरान उनकी 8 वर्षीय बच्ची परिसर में बिछड़ गई जिसमें पुलिस की मदद से सकुशल मिलवा दिया गया। छठें मामलें में मूल रुप से उत्तरप्रदेश व हाल में पंजाब में रहने वाले एक 22 वर्षीय युवती अपने पति से बिछड़ गई थी जिसे जल्द ही पुलिस ने मिलवा दिया। सातवां मामले में पंजाब से आए परिवार की 6 वर्षीय बच्ची के बिछड़ने की सुचना मिलते ही टूरिस्ट पुलिस पोस्ट टीम ने सकुशल मिलवा दिया। 
बच्चों के सकुशल मिलने पर उनके परिजनों ने पंचकूला पुलिस का आभार व्यक्त किया। वहीं, मंदिर परिसर के दुकानदारों और अन्य श्रद्धालुओं ने भी पुलिस टीम की तत्परता और सराहनीय कार्य की प्रशंसा की।

पुलिस कमिश्नर आईपीएस पंकज नैन ने बताया कि टूरिस्ट पुलिस की अलग वर्दी होने से श्रद्धालुओं के लिए पुलिसकर्मियों को पहचानना और उनसे सहायता लेना आसान होगा। यह टीम हरियाणा के साथ-साथ दूसरे राज्यों से माता के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं और पुलिस के बीच एक सेतु का कार्य कर रही है। 
पंचकूला कमिश्नर ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि मेले में छोटे बच्चों को अपने साथ रखते समय विशेष सावधानी बरतें, उनका हाथ पकड़कर रखें और बच्चों के बिछड़ने की स्थिति में तुरंत नजदीकी पुलिसकर्मी या टूरिस्ट पुलिस पोस्ट से संपर्क करें।
Video 1
दिल तो बहुत पहले दिया था, अब किडनी देकर पति को मौत से लौटा लाईं - 10 अक्टूबर जन्मदिन है शिमला के उस 'वेला' बॉबी का जो रोज 3000 भूखे पेट भरते हैं

शिमला। 10 अक्टूबर जन्मदिन है उस शख्स का, जिन्हें लोग प्यार से वेला बॉबी कहते हैं और अस्पताल में पड़ा मरीज मसीहा कहता है। पूरा नाम सरबजीत सिंह बॉबी जी।

10 अक्टूबर 1973 को शिमला के रिपन अस्पताल में इनका जन्म हुआ था। सेंट एडवर्ड्स स्कूल में छठी कक्षा में पढ़ते थे, तभी परिवार की स्थिति बिगड़ गई। तीन छोटी बहनों को पढ़ाना था, इसलिए 12 साल की उम्र में ही इन्होंने किताबें बंद कर दीं और लोअर बाजार में जूतों की दुकान संभाल ली।

25 अक्टूबर 2014 को IGMC कैंसर अस्पताल के बाहर इन्होंने एक केतली चाय से लंगर शुरू किया था, जो आज इनकी संस्था 'अलमाइटी ब्लेसिंग्स' के जरिए रोज 3000 से ज्यादा मरीजों और परिजनों का पेट भरता है। अब तक लाखों लोग भोजन कर चुके हैं।

**और जब मंडी डूब रहा था, तब ये फरिश्ता बनकर पहुँचे**

हिमाचल इस साल बाढ़ में रोया था। सबसे ज्यादा दर्द मंडी, सेराज और कुल्लू ने सहा। घर बह गए, रसोई उजड़ गई, सरकार के कागजों में राहत अटकी रही, लेकिन मंडी के बाढ़ पीड़ितों के लिए उस वक्त एक ही नाम फरिश्ता बना - वेला बॉबी।

जो काम बड़े-बड़े दावों में अटका था, वो काम बॉबी भाई जी ने करके दिखा दिया। इन्होंने लोगों से हाथ जोड़कर एक करोड़ रुपये से ज्यादा की मदद जुटाई। ट्रकों में भरकर राशन, कंबल, बर्तन और खाने का सामान खुद लेकर मंडी के अंदरूनी गांवों तक पहुँचे। वहाँ जहाँ जीप भी नहीं जा पा रही थी।

और सबसे बड़ी बात - इन्होंने सैकड़ों परिवारों के बैंक खातों में सीधे 25-25 हजार रुपये नकद मदद डाली, ताकि कोई भी परिवार किसी के आगे हाथ न फैलाए। कोई मंच नहीं, कोई भाषण नहीं, कोई फोटो खिंचवाने की होड़ नहीं। चुपचाप मदद पहुँचाई और चुपचाप लौट आए। मंडी के लोग आज भी कहते हैं, जो सरकार समय पर नहीं कर पाई, वो बॉबी भाई ने कर दिखाया।

यही इनकी पहचान है। रात के दो बजे जब कोई शव वाहन चलाने को तैयार नहीं होता, तब ये खुद स्टीयरिंग संभालते हैं। अब तक 5000 से ज्यादा लावारिस शवों को अंतिम यात्रा करवा चुके हैं। हर रविवार रिज पर रक्तदान शिविर लगाते हैं, 30 हजार यूनिट से ज्यादा खून दे चुके हैं।

**दिल तो बहुत पहले दिया था, अब किडनी भी दे दी**

2020 में इनकी दोनों किडनी फेल हो गईं। ये जिंदगी और मौत के बीच मौत को छूकर वापस लौटे हैं। तब इनकी धर्मपत्नी जी ढाल बनकर सामने आईं। दिल तो उन्होंने 25 साल पहले शादी के वक्त ही दे दिया था, इस बार 2021 में शादी की 25वीं सालगिरह पर अपनी एक किडनी देकर इन्हें नया जीवन दिया, ताकि इनकी समाज सेवा चलती रहे।

आज भी डायबिटीज के बावजूद इनके हाथों में वही कड़छी है।

लोग इन्हें 'वेला' कहते हैं। ये मुस्कुरा कर कहते हैं, "हाँ, मैं वेला हूँ। भगवान ने मुझे वेला इसलिए बनाया ताकि मैं आपके दर्द में शामिल हो सकूँ।"

आज इनके जन्मदिन पर शिमला और मंडी के हजारों हाथ दुआ कर रहे हैं। मंडी के वो परिवार जिनके उजड़े घरों में इन्होंने फिर से चूल्हा जलवाया, आज दिल से कह रहे हैं - जन्मदिन मुबारक हो बॉबी भाई जी, आप सलामत रहें।
Video 3
“आपकी अदाकारी हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगी, नाना पाटेकर जी। भावपूर्ण श्रद्धांजलि। 🙏”
Video 5
Video 6
Celebrating my 1st year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉
Celebrating my 1st year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉
अंबाला में 220 फीट गहरे बोरवेल में गिरे 4 साल के निरवैर सिंह का आज अंतिम संस्कार किया गया।  इससे पहले दोपहर को शव धन्यौड़ा गांव स्थित उसके घर लाया गया, जहां करीब 15 मिनट तक अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। इसके बाद गांव के श्मशान घाट में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। निरवैर को उसके पिता मनजीत सिंह ने मुखाग्नि दी। बता दें कि करीब 21 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बुधवार तड़के करीब साढ़े 3 बजे निरवैर का शव बोरवेल से निकाला गया था।

<nis:link nis:type=tag nis:id=nirvairrescueoperation nis:value=nirvairrescueoperation nis:enabled=true nis:link/>  <nis:link nis:type=tag nis:id=nirvairsingh nis:value=NirvairSingh nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=nirvairsinghfuneral nis:value=nirvairsinghfuneral nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=ambala nis:value=ambala nis:enabled=true nis:link/>
❓आख़िर कालका का 108 वर्ष पुराना हिन्दू कन्या स्कूल क्यों बंद पड़ा है?
1918 में स्थापित कालका का हिन्दू गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जो कभी क्षेत्र का सरकारी सहायता प्राप्त कन्या विद्यालय था, 2018 से बंद पड़ा है।
उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार, इसके पीछे कई सवाल सामने आते हैं—
🔹 क्या प्रबंधन समिति का गठन न होना इसकी सबसे बड़ी वजह है?
🔹 क्या प्रबंधन के भीतर की आंतरिक खींचतान ने बेटियों की शिक्षा पर ताला लगा दिया?
🔹 सरकारी शिक्षकों के अन्य स्कूलों में समायोजन के बाद स्कूल दोबारा क्यों नहीं चल पाया?
🔹 आखिर 8 साल बाद भी नई प्रबंधन समिति क्यों नहीं बन सकी?
🔹 इस ऐतिहासिक विद्यालय को दोबारा शुरू करने की जिम्मेदारी कौन लेगा?
यह किसी दल या व्यक्ति पर आरोप नहीं, बल्कि जनता की ओर से जवाब मांगने वाले सवाल हैं।
क्या कालका की बेटियों को उनका स्कूल वापस मिलेगा?
आपकी राय क्या है?

<nis:link nis:type=tag nis:id=कालका nis:value=कालका nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=हिन्दुकन्यास्कूल nis:value=हिन्दुकन्यास्कूल nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=जनहित nis:value=जनहित nis:enabled=true nis:link/>
Video 11
Video 12
पूरे <nis:link nis:type=tag nis:id=हिमाचल nis:value=हिमाचल nis:enabled=true nis:link/> में 24 घंटे के अंदर मानसून पूरी तरह पहुंच चुका है। मानसून ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। जहां एक तरफ लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिल रही है वहीं दूसरी तरफ काफी नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। लोगों के घरों में पानी घुस गया है जिससे घरों की दीवारों में दरारें आ गई हैं। ऊना के स्कूलों में पानी घुस गया है। मंडी में पहाड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में आने से महिला की मौत हो गई वहीं, लाहौल स्पीति में बीती रात को बादल फट गया है। 
<nis:link nis:type=tag nis:id=himachal nis:value=himachal nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=rain nis:value=rain nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=monsoon nis:value=monsoon nis:enabled=true nis:link/>
Video 14
Video 15
Video 16
Video 17
Celebrating my 1st year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉
Celebrating my 1st year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉
मंडी : मौ*त का कोई OTP नहीं आता भयानक मौ*त🥺😭💔  औट में उल्टी करने कार से उतरी नालागढ़ की महिला पर गिरा पत्थर मौ*,त
पूरे <nis:link nis:type=tag nis:id=हिमाचल nis:value=हिमाचल nis:enabled=true nis:link/> में 24 घंटे के अंदर मानसून पूरी तरह पहुंच चुका है। मानसून ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। जहां एक तरफ लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिल रही है वहीं दूसरी तरफ काफी नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। लोगों के घरों में पानी घुस गया है जिससे घरों की दीवारों में दरारें आ गई हैं। ऊना के स्कूलों में पानी घुस गया है। मंडी में पहाड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में आने से महिला की मौत हो गई वहीं, लाहौल स्पीति में बीती रात को बादल फट गया है। 
<nis:link nis:type=tag nis:id=himachal nis:value=himachal nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=rain nis:value=rain nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=monsoon nis:value=monsoon nis:enabled=true nis:link/>
❓आख़िर कालका का 108 वर्ष पुराना हिन्दू कन्या स्कूल क्यों बंद पड़ा है?
1918 में स्थापित कालका का हिन्दू गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जो कभी क्षेत्र का सरकारी सहायता प्राप्त कन्या विद्यालय था, 2018 से बंद पड़ा है।
उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार, इसके पीछे कई सवाल सामने आते हैं—
🔹 क्या प्रबंधन समिति का गठन न होना इसकी सबसे बड़ी वजह है?
🔹 क्या प्रबंधन के भीतर की आंतरिक खींचतान ने बेटियों की शिक्षा पर ताला लगा दिया?
🔹 सरकारी शिक्षकों के अन्य स्कूलों में समायोजन के बाद स्कूल दोबारा क्यों नहीं चल पाया?
🔹 आखिर 8 साल बाद भी नई प्रबंधन समिति क्यों नहीं बन सकी?
🔹 इस ऐतिहासिक विद्यालय को दोबारा शुरू करने की जिम्मेदारी कौन लेगा?
यह किसी दल या व्यक्ति पर आरोप नहीं, बल्कि जनता की ओर से जवाब मांगने वाले सवाल हैं।
क्या कालका की बेटियों को उनका स्कूल वापस मिलेगा?
आपकी राय क्या है?

<nis:link nis:type=tag nis:id=कालका nis:value=कालका nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=हिन्दुकन्यास्कूल nis:value=हिन्दुकन्यास्कूल nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=जनहित nis:value=जनहित nis:enabled=true nis:link/>
राजधानी शिमला में दक्षिण-पश्चिम मानसून की पहली तेज बारिश के साथ ही मंगलवार को बड़ा भूस्खलन देखने को मिला। दोपहर बाद हुई बारिश के कुछ समय बाद शिमला-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग के बैरियर क्षेत्र में पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया, जिससे भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें सड़क पर आ गिरीं। इसके कारण शिमला-चक्कर मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। राहत की बात यह रही कि हादसे के दौरान कोई वाहन मलबे की चपेट में नहीं आया और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं तथा जेसीबी मशीनों की सहायता से सड़क से मलबा हटाने का कार्य शुरू किया गया, जो देर शाम तक जारी रहा।

भूस्खलन का असर पास से गुजरने वाले शिमला-कालका राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी पड़ा। सुरक्षा कारणों से वाहनों की आवाजाही धीमी कर दी गई, जिससे दोनों ओर लंबा जाम लग गया और लोगों को काफी देर तक परेशानी झेलनी पड़ी। यातायात सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिस ने वाहनों को वैकल्पिक बालूगंज मार्ग की ओर मोड़ दिया, जिसके बाद हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे। मानसून के आगमन के साथ प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन की आशंका बढ़ गई है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और संवेदनशील क्षेत्रों में पूरी सावधानी बरतने की अपील की है।
❓आख़िर कालका का 108 वर्ष पुराना हिन्दू कन्या स्कूल क्यों बंद पड़ा है?
1918 में स्थापित कालका का हिन्दू गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जो कभी क्षेत्र का सरकारी सहायता प्राप्त कन्या विद्यालय था, 2018 से बंद पड़ा है।
उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार, इसके पीछे कई सवाल सामने आते हैं—
🔹 क्या प्रबंधन समिति का गठन न होना इसकी सबसे बड़ी वजह है?
🔹 क्या प्रबंधन के भीतर की आंतरिक खींचतान ने बेटियों की शिक्षा पर ताला लगा दिया?
🔹 सरकारी शिक्षकों के अन्य स्कूलों में समायोजन के बाद स्कूल दोबारा क्यों नहीं चल पाया?
🔹 आखिर 8 साल बाद भी नई प्रबंधन समिति क्यों नहीं बन सकी?
🔹 इस ऐतिहासिक विद्यालय को दोबारा शुरू करने की जिम्मेदारी कौन लेगा?
यह किसी दल या व्यक्ति पर आरोप नहीं, बल्कि जनता की ओर से जवाब मांगने वाले सवाल हैं।
क्या कालका की बेटियों को उनका स्कूल वापस मिलेगा?
आपकी राय क्या है?

<nis:link nis:type=tag nis:id=कालका nis:value=कालका nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=हिन्दुकन्यास्कूल nis:value=हिन्दुकन्यास्कूल nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=जनहित nis:value=जनहित nis:enabled=true nis:link/>