
गुरपा थाना क्षेत्र के बाजार से कल एक व्यक्ति का अगवा किया गया था। अगवा व्यक्ति नंदलाल भुतकुआ गांव का रहने वाला है। नंदलाल ने डायल 112 की पुलिस को फोन किया। जिस घर में नंदलाल को रखा गया था, वह घर गुरपा थाना क्षेत्र के मोरवे गांव में था। डायल 112 की पुलिस ने गुरपा थाना क्षेत्र के मोरवे गांव के एक घर से नंदलाल को बरामद कर थाने लाया। नंदलाल ने गुरपा थाना में लिखित आवेदन दिया। इसके बाद नंदलाल का इलाज फतेहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया।
कुछ पत्रकार बंधुओं द्वारा प्रकाशित खबर पढ़ने के बाद मैंने मामले की पड़ताल शुरू की। खबर में फतेहपुर थाना क्षेत्र के मोरहे गांव का जिक्र किया गया था। हमने सबसे पहले मोरहे गांव के कुछ लोगों से संपर्क किया और यह जानने की कोशिश की कि नंदलाल को मोरहे गांव में किसके घर से बरामद किया गया और वह वहां कैसे पहुंचा।
मोरहे गांव के लोगों ने बताया कि उनके गांव में ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं है। इसके बाद हमारी पड़ताल फतेहपुर थाना तक पहुंची। हमारी बात डायल 112 की पुलिस से हुई। पुलिसकर्मियों ने स्पष्ट रूप से बताया कि उन्होंने मोरहे गांव से किसी व्यक्ति को बरामद नहीं किया है और न ही उन्हें इस मामले की कोई जानकारी है।
यह बात सुनकर हम भी हैरान रह गए, क्योंकि प्रकाशित खबर में साफ लिखा गया था कि डायल 112 की पुलिस ने मोरहे गांव से नंदलाल को बरामद किया है।
इसके बाद हमारी पड़ताल गुरपा थाना की ओर बढ़ी। गुरपा बाजार के कुछ लोगों से हमारी मुलाकात हुई। उन्होंने बताया कि जिस व्यक्ति का अपहरण किया गया था और जिस व्यक्ति पर अपहरण करने का आरोप है, दोनों के बीच पारिवारिक रिश्ता है। यह जानकारी सामने आने के बाद हमने मामले की और गहराई से पड़ताल शुरू की।
जिस घर से नंदलाल को बरामद किया गया, उस घर के व्यक्ति का नाम रामाशीष कुमार है। बताया गया कि रामाशीष कुमार के मामा-ससुर लगते हैं नंदलाल यादव। कुछ दिन पहले रामाशीष के साथ नंदलाल यादव द्वारा मारपीट किए जाने की बात भी सामने आई। इसी विवाद को लेकर रामाशीष द्वारा नंदलाल को अगवा किए जाने की बात बताई गई।
इसके बाद हमारी मुलाकात गुरपा थानाध्यक्ष शिवनंदन कुमार से हुई। उन्होंने बताया कि गुरपा बाजार से नंदलाल यादव को अगवा कर मोरवे गांव में रखा गया था। बाद में डायल 112 की पुलिस नंदलाल को मोरवे गांव से बरामद कर थाने लेकर आई थी।
इसके बाद हमने उन डायल 112 के पुलिसकर्मियों से भी बात की, जिन्होंने नंदलाल को बरामद किया था। उन्होंने भी बताया कि नंदलाल को मोरवे गांव से ही बरामद किया गया था।
हमारी पड़ताल में यह बात स्पष्ट हुई कि घटना में मोरहे गांव का कोई संबंध नहीं था। इसके बावजूद खबर में मोरहे गांव का नाम कैसे जुड़ गया,यह भी सामने आया।
जानकारी के अनुसार,फतेहपुर के कुछ पत्रकार बंधुओं को एक अन्य पत्रकार द्वारा घटना और गांव का नाम लिखकर खबर भेजी गई थी। उसी जानकारी के आधार पर कुछ पत्रकार बंधुओं ने खबर प्रकाशित कर दी। न तो खबर की स्वतंत्र रूप से जांच की गई, न थानाध्यक्ष से बात की गई और न ही डायल 112 की पुलिस से मामले की पुष्टि की गई। इसी वजह से खबर में गांव का नाम गलत प्रकाशित कर दिया गया।
मेरा सिर्फ इतना आग्रह है कि प्रकाशित खबर में मोरहे गांव का जो नाम गलत तरीके से लिखा गया है, उसका खंडन करते हुए उसे हटा दिया जाए, ताकि निर्दोष गांव का नाम इस मामले से न जुड़े।
साथ ही, मैं सभी पत्रकार बंधुओं से आग्रह करता हूं कि कोई भी खबर प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से जांच जरूर करें। किसी व्यक्ति द्वारा भेजी गई खबर पर पूरी तरह निर्भर न रहें। खबर की पुष्टि संबंधित थाना, पुलिस अधिकारी या घटना से जुड़े लोगों से जरूर करें, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति या गांव का नाम गलत खबर में न आए और पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनी रहे।
Fatehpur, Gaya | Aug 22, 2026