
#सफलता_की_कहानी
आधुनिक पीपीएच कैन्युला तकनीक से बची दो माताओं की जान
जिला चिकित्सालय छिंदवाड़ा में चिकित्सकों की तत्परता और कुशल उपचार से मिली नई जिंदगी
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जिला चिकित्सालय छिंदवाड़ा में चिकित्सकीय दक्षता, त्वरित निर्णय क्षमता एवं आधुनिक उपचार तकनीकों के प्रभावी उपयोग से मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में एक उल्लेखनीय सफलता दर्ज की गई है। अत्यधिक रक्तस्राव (पोस्ट पार्टम हेमरेज-पीपीएच) से जूझ रही दो गंभीर मरीजों का सफल उपचार कर चिकित्सकों ने न केवल उनके प्राणों की रक्षा की, बल्कि संभावित जटिल सर्जिकल हस्तक्षेपों से भी उन्हें सुरक्षित रखा। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपी महाजन एवं उनकी टीम द्वारा पीपीएच कैन्युला तकनीक के सफल उपयोग से प्राप्त यह उपलब्धि जिला चिकित्सालय में उपलब्ध गुणवत्तापूर्ण एवं जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाओं का उत्कृष्ट उदाहरण है।
जटिल सिजेरियन प्रसव के बाद नियंत्रित किया गंभीर रक्तस्राव- जिला चिकित्सालय में भर्ती श्रीमती चांदनी भूपेंद्र वर्मा को गर्भस्थ शिशु में संकट की स्थिति उत्पन्न होने पर आपातकालीन सिजेरियन ऑपरेशन (एलएससीएस) किया गया। ऑपरेशन के उपरांत उन्हें एटोनिक पीपीएच की गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ा, जिसमें गर्भाशय का संकुचन नहीं होने के कारण अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया।
चिकित्सकीय टीम द्वारा आवश्यक दवाओं एवं पारंपरिक उपचार पद्धतियों का उपयोग किए जाने के बावजूद रक्तस्राव नियंत्रित नहीं हो सका। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉ. दीपी महाजन द्वारा तत्काल पीपीएच कैन्युला तकनीक का उपयोग किया गया। गर्भाशय में वैक्यूम प्रेशर निर्मित होने के बाद गर्भाशय का संकुचन पुनः स्थापित हुआ और रक्तस्राव पूरी तरह नियंत्रित हो गया। समय पर किए गए इस उपचार से मरीज की स्थिति शीघ्र सामान्य हो गई।
अधूरे गर्भपात के बाद गंभीर स्थिति में मिला प्रभावी उपचार- दूसरे मामले में श्रीमती भावना दीपक कराडे दूसरी तिमाही के अधूरे गर्भपात के बाद गंभीर स्थिति में जिला चिकित्सालय पहुंचीं। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि भ्रूण बाहर आ चुका था, जबकि प्लेसेंटा गर्भाशय में ही शेष था। चिकित्सकों द्वारा आवश्यक प्रक्रिया के माध्यम से प्लेसेंटा को सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन इसके बाद मरीज को अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा।
रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए सभी आवश्यक उपचारात्मक उपाय किए गए, किंतु अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। मरीज को आगे की सर्जिकल प्रक्रिया के लिए तैयार किया जा रहा था, तभी अंतिम जीवनरक्षक उपाय के रूप में पीपीएच कैन्युला का उपयोग किया गया। तकनीक के प्रयोग के मात्र 15 मिनट के भीतर रक्तस्राव पूरी तरह नियंत्रित हो गया। इसके साथ ही आवश्यक रक्त एवं रक्त अवयव उपलब्ध कराकर मरीज को पूर्णतः स्थिर किया गया।
मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार और उत्कृष्टता का उदाहरण - दोनों गंभीर मामलों में पीपीएच कैन्युला तकनीक के सफल उपयोग ने यह सिद्ध किया कि समय पर सही चिकित्सकीय निर्णय एवं आधुनिक उपचार पद्धतियां गंभीर परिस्थितियों में भी प्रभावी परिणाम दे सकती हैं। इस तकनीक की मदद से दोनों मरीजों को बड़े एवं जटिल सर्जिकल ऑपरेशनों, विशेष रूप से गर्भाशय निष्कासन जैसी प्रक्रियाओं से बचाया जा सका।
जिला चिकित्सालय छिंदवाड़ा द्वारा प्राप्त यह सफलता मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि आधुनिक चिकित्सा तकनीक, प्रशिक्षित चिकित्सकीय दल एवं समयबद्ध उपचार व्यवस्था के समन्वय से मातृ मृत्यु के जोखिम को कम करते हुए सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित किया जा सकता है।
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Jansampark Madhya Pradesh