'संस्कृति के संरक्षण की आवश्यकता'
सिमरिया धाम स्थित सर्वमंगला सिद्धाश्रम में तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन करते अतिथि।
सर्वमंगला अध्यात्म योग विद्यापीठ परिसर स्थित सर्वमंगला ज्ञान मंच पर पांच दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर रविवार को त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया गया।
संगोष्ठी के प्रथम दिन के मुख्य अतिथि बिहार सरकार के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी डॉ. श्यामल किशोर पाठक ने कहा कि सनातन संस्कृति का अर्थ है
सनातन संस्कृति का अर्थ है शाश्वत और अनंत जीवनशैली
शाश्वत और अनंत जीवनशैली। सनातन संस्कृति जीवात्मा की अमरता और शाश्वतता को स्वीकार करती है।
आज सनातन धर्म और संस्कृति के सरंक्षण की आवश्यकता है। विशिष्ट अतिथिमैथिली साहित्यकार डॉ. योगानंद
शास्त्री ने कहा कि सनातन दर्शन में ईश्वर अंश जीव अविनाशी से यह स्वतः प्रमाणित है कि जीवात्मा ईश्वर का अंश होने के कारण स्वयं भी ईश्वर की भांति ही अमर हैं।
डॉ. परमानंद लाभ ने कहा कि जीवात्मा को जानना ही परमात्मा को जानना है। डॉ. जनार्दन चौधरी ने कहा कि अमरता पर विचार करना मानव जीवन का परम सौभाग्य है