
पांगी कॉलेज से साइंस और कॉमर्स विषय हटाने के फैसले पर बवाल, पंगवाल एकता मंच ने दी आंदोलन की चेतावनी
पांगी, चंबा।
जनजातीय एवं दुर्गम पांगी घाटी के एकमात्र डिग्री कॉलेज से साइंस और कॉमर्स संकाय के विषयों तथा संबंधित असिस्टेंट प्रोफेसरों के पद समाप्त किए जाने के सरकारी निर्णय का क्षेत्र में तीखा विरोध शुरू हो गया है। इस फैसले को लेकर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में भारी रोष व्याप्त है। पंगवाल एकता मंच ने इसे पांगी के विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए तत्काल निर्णय वापस लेने की मांग की है।
पंगवाल एकता मंच का कहना है कि पांगी जैसे दुर्गम क्षेत्र में उच्च शिक्षा के अवसर पहले ही सीमित हैं। ऐसे में कॉलेज से साइंस और कॉमर्स विषयों को हटाना यहां के विद्यार्थियों को डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, चार्टर्ड अकाउंटेंट तथा अन्य पेशेवर क्षेत्रों में आगे बढ़ने के अवसरों से वंचित करने जैसा है। मंच के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि यह निर्णय घाटी के युवाओं के शैक्षणिक भविष्य को कमजोर करने वाला कदम है।
मंच ने प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग से सवाल किया है कि क्या पांगी जैसे भौगोलिक रूप से कठिन और जनजातीय क्षेत्र के लिए वही मापदंड लागू किए जा सकते हैं जो मैदानी क्षेत्रों के कॉलेजों पर लागू होते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा सचिव स्वयं पांगी में एसडीएम के रूप में सेवाएं दे चुके हैं और उन्हें क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, शैक्षणिक चुनौतियों तथा विद्यार्थियों की समस्याओं की पूरी जानकारी है। ऐसे में पांगी कॉलेज के लिए पुनर्गठन (रिस्ट्रक्चरिंग) के दौरान विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए था।
पंगवाल एकता मंच ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि पांगी डिग्री कॉलेज में साइंस और कॉमर्स विषयों को तत्काल बहाल किया जाए तथा असिस्टेंट प्रोफेसरों के पदों को पुनः स्वीकृत किया जाए। मंच का कहना है कि यदि जुलाई माह तक सरकार ने इस निर्णय को वापस नहीं लिया तो क्षेत्र में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला जाएगा।
हैरानी की बात यह भी बताई जा रही है कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर क्षेत्र की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां कांग्रेस और भाजपा दोनों ही मौन बनी हुई हैं। वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा भी अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। क्षेत्र के अभिभावकों और विद्यार्थियों का मानना है कि यदि यह निर्णय लागू रहता है तो आने वाले वर्षों में पांगी के विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर पांगी जैसे जनजातीय क्षेत्र के विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करने तथा कॉलेज में पूर्व व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।
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Saach, Chamba | Jun 20, 2026