प्रयागराज का यह सबसे पुराना पुल जो कि अंग्रेजो के द्वारा बनवाया गया था आज 160 साल होने के बावजूद भी यह चार-चार सेवाएं दे रहा है लेकिन इसमें एक पिलर ऐसा बनाया गया है इसके बारे में कहा जाता है कि अंग्रेजो के नाक में इस पिलर ने दम कर दिया था क्योंकि दिन में यह पिलर बनाया जाता था और रात में यह पिलर गिर जाता था जिसको बनाने में पूरे 2 वर्ष लगे अंत में इस जूते का आकार दिया गया तब जाकर यह पिलर बनकर खड़ा हुआ प्रयागराज के नैनी में अंग्रेजी हुकूमत के दौरान बना यमुना पुल अगले माह 15 अगस्त को 160 वर्ष पूरे कर लेगा. इसे बनाने में 6 वर्ष का समय लगा था. 15 अगस्त 1865 को पहली बार इस पुल से ट्रेन गुजरी थी. इस पुल को ट्रेनों की 160 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार के लिए तैयार किया जा चुका है. यह पुल अब भी उपयोगी है. इससे प्रतिदिन करीब 200 ट्रेनें गुजरती हैं. जब इस पुल पर ट्रेनों का आवागमन शुरू हुआ तो उस दौरान अधिकतम स्पीड 50 से 60 किमी प्रतिघंटा ही रहती थी. रेलवे के मिशन रफ्तार प्रोजेक्ट के तहत महत्वपूर्ण तकनीकी कार्य किए गए. इस पुल की लंबाई 1,006 मीटर है.