
पटी डेम के सुलूस गेट के नीचे छह फीट गहरे गड्ढे, बांध की मेढ़ पर मंडराया खतरा
मेढ़ पर उगे पेड़-पौधों और बदहाल नहर से भी बढ़ी किसानों की चिंता, डब्ल्यूआरडी के एसई बोले—“मामले को दिखवाता हूं”
रैपुरा। तहसील मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित पटी डेम की सुरक्षा को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। डैम से नहर में पानी की निकासी के लिए बनाए गए दोनों सुलूस गेट के नीचे बांध की मेढ़ पर करीब छह फीट गहरे गड्ढे हो गए हैं। गड्ढों में पानी भरा होने के कारण मेढ़ की मजबूती को लेकर ग्रामीण आशंकित हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक सुलूस गेट के नीचे गड्ढे होने की समस्या नई नहीं है। पिछले वर्ष भी इसी स्थान पर गड्ढे बने थे, जिन्हें मिट्टी डालकर भर दिया गया था। किसानों का कहना है कि स्थायी उपचार नहीं होने के कारण इस वर्ष दोबारा गड्ढे बन गए हैं।
तेज बारिश में बढ़ सकता है खतरा
किसानों का कहना है कि यदि लगातार तेज बारिश होती है और डेम में जलस्तर एवं पानी का दबाव बढ़ता है, तो सुलूस गेट के आसपास की कमजोर मेढ़ के क्षतिग्रस्त होने का खतरा पैदा हो सकता है। ऐसी स्थिति में पटी, माधोपुरा सहित आसपास के गांवों के किसानों की सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि प्रभावित होने की आशंका है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचकर मेढ़ और सुलूस गेट के आसपास की स्थिति की तकनीकी जांच कराएं तथा गड्ढों का स्थायी उपचार कराया जाए।
मेढ़ पर उगे पेड़-पौधों से भी चिंता
डेम की मुख्य मेढ़ की अंदर और बाहर की ओर बड़ी संख्या में पेड़-पौधे उग आए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि मेढ़ पर आधा सैकड़ा से अधिक पेड़-पौधे खड़े हैं। लंबे समय से साफ-सफाई नहीं होने के कारण इनकी जड़ें बांध की पिचिंग और संरचना के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं।
किसानों ने मेढ़ की साफ-सफाई कराने के साथ ही आवश्यक मरम्मत और सुरक्षा संबंधी कार्य कराने की मांग की है।
डेम में पानी, फिर भी किसानों के खेत सूखे
पटीखेड़ा के ग्रामीणों की एक और बड़ी शिकायत नहर से जुड़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि डेम बनने के बाद से नहर का पानी किसानों को पर्याप्त रूप से नहीं मिल पा रहा है। कई स्थानों पर पानी डेम से कुछ दूरी तक पहुंचने के बाद आगे नहीं बढ़ता। ग्रामीणों के अनुसार कहीं नहर क्षतिग्रस्त है तो कहीं स्लोप सही नहीं होने के कारण पानी आगे नहीं पहुंच पाता।
किसानों का कहना है कि एक तरफ डेम की मेढ़ की सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है, तो दूसरी तरफ नहर की बदहाल स्थिति के कारण डेम में पानी होने के बावजूद खेतों तक पर्याप्त सिंचाई पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
विभाग ने जांच का दिया भरोसा
मामले को लेकर जल संसाधन विभाग पन्ना के एसई सी.बी. अहिरवार ने कहा, “मैं मामले को दिखवाता हूं।”
अब किसानों को उम्मीद है कि विभागीय अमला मौके का निरीक्षण कर सुलूस गेट के नीचे बने गड्ढों, मेढ़ पर उगे पेड़-पौधों और नहर की स्थिति की जांच करेगा तथा आवश्यक सुधार कार्य कराएगा।
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