
कहते हैं अगर रगों में जीतने का लहू और मन में अटूट विश्वास हो, तो शरीर की कोई भी अक्षमता आपके सपनों का रास्ता नहीं रोक सकती। मध्य प्रदेश में मऊगंज के मगनिया गांव के रहने वाले जांबाज दिव्यांग युवा पुष्पेंद्र कुमार चतुर्वेदी ने इस बात को सच कर दिखाया है। पैरों से ठीक से न चल पाने की बड़ी शारीरिक चुनौती के बावजूद, उन्होंने विपरीत परिस्थितियों के आगे कभी घुटने नहीं टेके। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने जी-तोड़ मेहनत की और बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर 'राजस्व अधिकारी' (Revenue Officer) का बड़ा प्रशासनिक पद हासिल कर लिया है।
पुष्पेंद्र की यह ऐतिहासिक कामयाबी रातों-रात मिली किस्मत की लकीर नहीं, बल्कि सीमित साधनों के बीच उनके पिता (वन विभाग कर्मचारी) के सहयोग, माता-पिता के आशीर्वाद और बरसों की कड़ी तपस्या का परिणाम है। अपनी इस अविश्वसनीय जीत पर पुष्पेंद्र गर्व से कहते हैं कि उन्होंने खुद को कभी भी दूसरों से कमजोर या लाचार नहीं समझा। उनकी यह कहानी देश के करोड़ों युवाओं के लिए एक महा-प्रेरणा है कि दिव्यांगता केवल शरीर की एक सीमा हो सकती है, मन की नहीं; अगर आपकी जिद मंजिलों से ऊंची है, तो पूरी कायनात आपके कदमों में झुक जाती है।
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