Public App Logo
Jansamasya
News
Maharashtra
Bjp
National
Police
Bihar
India
चोरी
बीजेपी
Uttar_pradesh
Gujarat
Accident
Congress
Modi
Delhi
Viral
पेट्रोल
Up
Bollywood
Breakingnews
Narendramodi
Madhya_pradesh
Mp
Pmmodi
Telangana
Rahulgandhi
Chhattisgarh
Uttarpradesh
Haryana

आम के बाग में टहनियां ऊपर से सूख रही हैं? सावधान! यह साधारण सूखापन नहीं, बल्कि "उल्टा सूखा रोग (Dieback Disease)" हो सकता है। यदि समय रहते इसकी पहचान और नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह धीरे-धीरे पूरे पेड़ को कमजोर कर सकता है, उत्पादन घटा सकता है और अंततः पेड़ को भी नष्ट कर सकता है। इस समय बिहार सहित कई राज्यों में यह रोग तेजी से देखने को मिल रहा है, इसलिए हर आम उत्पादक किसान को इसके बारे में पूरी जानकारी होना बेहद जरूरी है। आम को फलों का राजा कहा जाता है, लेकिन इस राजा को भी कई गंभीर बीमारियां प्रभावित करती हैं। इनमें सबसे खतरनाक रोगों में से एक है उल्टा सूखा रोग (Dieback Disease)। इसका नाम ही इसकी पहचान बताता है। यह रोग पेड़ की सबसे ऊपरी और नई टहनियों से शुरू होता है और धीरे-धीरे पीछे की ओर बढ़ते हुए बड़ी शाखाओं तक पहुंच जाता है। यदि समय पर रोकथाम नहीं की जाए तो पूरा पेड़ सूख सकता है। इस रोग की सबसे पहली पहचान नई और कोमल टहनियों का सूखना है। शुरुआत में टहनी के सिरे की पत्तियां हल्की मुरझाने लगती हैं, फिर उनका रंग भूरा हो जाता है और वे सूखकर गिरने लगती हैं। धीरे-धीरे पूरी टहनी सूख जाती है। यदि संक्रमित टहनी को काटकर देखें तो उसके अंदर की लकड़ी या संवहन ऊतक (वैस्कुलर बंडल) भूरे या काले रंग के दिखाई देते हैं। स्वस्थ शाखा के अंदर का भाग सफेद होता है, जबकि संक्रमित शाखा अंदर से काली या भूरी दिखाई देती है। कई बार तने या शाखाओं से गोंद (Gummosis) भी निकलने लगता है, जो इस रोग का महत्वपूर्ण लक्षण है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह रोग नई फलदार टहनियों को सबसे पहले प्रभावित करता है। परिणामस्वरूप नई शाखाएं विकसित नहीं हो पातीं, फूल कम आते हैं, फल लगना घट जाता है और उत्पादन लगातार कम होने लगता है। यदि संक्रमण अधिक बढ़ जाए तो पूरा पेड़ धीरे-धीरे सूख सकता है। ऐसे पेड़ों से आर्थिक रूप से लाभ लेना लगभग असंभव हो जाता है। यह रोग मुख्य रूप से Lasiodiplodia theobromae नामक फफूंद से होता है। कई परिस्थितियों में Botryosphaeria और Colletotrichum प्रजातियां भी इसका कारण बन सकती हैं। यह रोग सामान्यतः कमजोर पेड़ों पर अधिक हमला करता है। जिन पेड़ों में पानी की कमी, पोषक तत्वों की कमी, जड़ों पर तनाव या किसी प्रकार की चोट होती है, उनमें संक्रमण की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। पेड़ों की छंटाई के बाद यदि कटे हुए भाग पर कोई सुरक्षात्मक लेप नहीं लगाया जाता, तो वही स्थान इस फफूंद के प्रवेश का सबसे आसान रास्ता बन जाता है। इसी प्रकार खेत में खरपतवार अधिक होना, बगीचे में गंदगी रहना, लगातार नमी बनी रहना और खराब जल निकास भी इस रोग को बढ़ावा देते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार लगभग 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान और 80 प्रतिशत या उससे अधिक आर्द्रता इस रोग के तेजी से फैलने के लिए सबसे अनुकूल परिस्थितियां हैं। यही कारण है कि मानसून के दौरान या लगातार बादल और उमस वाले मौसम में इसका प्रकोप अधिक दिखाई देता है। कुछ आम की किस्में इस रोग के प्रति अधिक संवेदनशील मानी जाती हैं। विशेष रूप से दशहरी, मालदा और मल्लिका में इसका प्रकोप अधिक देखा जाता है। वहीं अल्फांसो और अरुणिका जैसी कुछ किस्मों में रोग का प्रभाव अपेक्षाकृत कम पाया गया है। अच्छी बात यह है कि यदि किसान समय पर पहचान कर लें तो इस रोग का प्रभावी नियंत्रण संभव है। सबसे पहले बगीचे की नियमित निगरानी करें। जैसे ही कोई सूखी टहनी दिखाई दे, उसे तुरंत काट दें। लेकिन केवल सूखे हिस्से तक ही नहीं, बल्कि जहां तक अंदर का भाग स्वस्थ और सफेद दिखाई देने लगे, उससे थोड़ा नीचे तक कटाई करें ताकि संक्रमित ऊतक पूरी तरह हट जाए। कटाई के बाद कटे हुए भाग को खुला बिल्कुल न छोड़ें। वहां तुरंत बोर्डो पेस्ट या ब्लाइटॉक्स-50 का लेप करें। इससे फफूंद दोबारा प्रवेश नहीं कर पाती। बोर्डो पेस्ट बनाने की विधि • 1 किलोग्राम तूतिया (Copper Sulphate) • 1 किलोग्राम चूना • दोनों को अलग-अलग 5-5 लीटर पानी में प्लास्टिक की बाल्टी में घोलें। • बाद में दोनों घोल मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार करें। • इस पेस्ट को कटे हुए भाग पर ब्रश से अच्छी तरह लगा दें। यदि बोर्डो पेस्ट उपलब्ध न हो तो ब्लाइटॉक्स-50 @ 3 ग्राम प्रति लीटर पानी का गाढ़ा घोल बनाकर कटे हुए भाग पर पेंट की तरह लगाया जा सकता है। पूरे पेड़ की सुरक्षा के लिए कार्बेन्डाजिम + मैनकोजेब (Companion या SAAF) का छिड़काव भी बहुत प्रभावी माना जाता है। मात्रा • 2 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी • पूरे पेड़ पर समान रूप से छिड़काव करें। • आवश्यकता होने पर 12–15 दिन बाद दोबारा स्प्रे करें। रासायनिक नियंत्रण के साथ-साथ पोषण प्रबंधन भी उतना ही जरूरी है। कमजोर पेड़ इस रोग का जल्दी शिकार बनते हैं। एक पेड़ के लिए निम्न मिश्रण उपयोगी माना गया है- • कॉपर सल्फेट – 100 ग्राम • बोरेक्स – 100 ग्राम • म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) – 100 ग्राम • डीएपी – 250 ग्राम • यूरिया – 250 ग्राम इन सभी को 15–20 किलोग्राम अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर पेड़ के चारों ओर लगभग 1 मीटर के घेरे में मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें। इससे पोषण संतुलन सुधरता है और पेड़ की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यदि किसान जैविक खेती करना चाहते हैं, तो ट्राइकोडर्मा विरिडी, ट्राइकोडर्मा हर्जियानम या ट्राइकोडर्मा एस्पेरेलम का प्रयोग भी लाभदायक रहता है। मात्रा • 100–200 ग्राम ट्राइकोडर्मा कल्चर • 15–20 किलोग्राम गोबर की खाद में मिलाकर पेड़ की जड़ों के आसपास डालें। इससे मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीव बढ़ते हैं और रोगजनक फफूंद का विकास कम होता है। यदि कोई पेड़ अत्यधिक संक्रमित हो चुका है और उसकी अधिकांश शाखाएं सूख गई हैं, तो ऐसे पेड़ को बचाने की कोशिश करने की बजाय जड़ सहित उखाड़ देना बेहतर होता है। उखाड़ने के बाद गड्ढे की मिट्टी को कार्बेन्डाजिम + मैनकोजेब @ 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल से उपचारित करें और उस स्थान पर तुरंत नया पौधा न लगाएं। कम से कम एक मौसम तक गड्ढा खाली छोड़ना बेहतर रहेगा। रोकथाम उपचार से हमेशा बेहतर होती है। इसलिए प्रत्येक किसान को कुछ सामान्य सावधानियां अवश्य अपनानी चाहिए। बगीचे को हमेशा खरपतवार मुक्त रखें। पेड़ों में जलभराव बिल्कुल न होने दें। संतुलित मात्रा में खाद और उर्वरकों का प्रयोग करें। कटाई-छंटाई के बाद हमेशा कटे हुए भाग पर बोर्डो पेस्ट या ब्लाइटॉक्स का लेप करें। पेड़ों को किसी प्रकार की अनावश्यक चोट न पहुंचाएं। जुलाई तथा सितंबर–नवंबर के दौरान तने पर बोर्डो पेस्ट की सफेदी (पेंटिंग) करना लाभदायक माना जाता है। नियमित रूप से बगीचे का निरीक्षण करें ताकि शुरुआती संक्रमण तुरंत पकड़ में आ जाए। आज जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान, आर्द्रता और मौसम का संतुलन तेजी से बदल रहा है। पहले जो रोग सीमित क्षेत्रों तक रहते थे, वे अब बड़े पैमाने पर फैलने लगे हैं। इसलिए केवल दवा पर निर्भर रहने की बजाय वैज्ञानिक बाग प्रबंधन अपनाना ही सबसे प्रभावी उपाय है। यदि आपके आम के बाग में भी नई टहनियां ऊपर से सूख रही हैं, पत्तियां भूरी होकर गिर रही हैं या शाखाओं से गोंद निकल रहा है, तो इसे सामान्य सूखापन समझकर नजरअंदाज न करें। तुरंत पहचान करें, संक्रमित भाग की छंटाई करें और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार उपचार अपनाएं। समय पर किया गया सही प्रबंधन न केवल आपके पेड़ों को बचाएगा बल्कि आने वाले वर्षों तक बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा भी सुनिश्चित करेगा। क्या आपके आम के बाग में भी उल्टा सूखा रोग (Dieback) के लक्षण दिखाई दे रहे हैं? अपने जिले का नाम और समस्या कमेंट में लिखें। यदि संभव हो तो प्रभावित टहनी की तस्वीर भी साझा करें, ताकि सही पहचान और उचित सलाह दी जा सके। #MangoFarming #DiebackDisease #PlantProtection #Horticulture #KhetiJankari

Mariahu, Jaunpur | Jul 4, 2026

MORE NEWS

आम के बाग में टहनियां सूखने लगी हैं? तुरंत करें यह उपाय, #आम #Mango #DiebackDisease #MangoFarming #MangoOrchard

आम के बाग में टहनियां सूखने लगी हैं? तुरंत करें यह उपाय, #आम #Mango #DiebackDisease #MangoFarming #MangoOrchard

Mariahu, Jaunpur | Jul 4, 2026

🌾 100 किलो गेहूं उगाने वाला किसान कर्जदार... लेकिन उसी गेहूं से दलिया बेचने वाला व्यापारी अमीर क्यों?

क्या समस्या खेती में है... या हमारी कृषि व्यवस्था में?
किसान पूरे साल मेहनत करता है, जोखिम उठाता है, कर्ज लेकर खेती करता है और अंत में अपनी उपज कम दाम पर बेचने को मजबूर हो जाता है। वहीं वही गेहूं जब दलिया, आटा, सूजी या मैदा बनकर पैकेट में बाजार पहुंचता है, तो उसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है।
आखिर किसान को उसकी मेहनत का उचित हिस्सा क्यों नहीं मिलता?

इस वीडियो में जानिए-
✅ किसान की असली लागत क्या होती है?
✅ मंडी से बाजार तक कीमत कई गुना कैसे बढ़ जाती है?
✅ MSP और MRP में क्या अंतर है?
✅ Value Addition क्या है और इससे सबसे ज्यादा कमाई कौन करता है?
✅ FPO, प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग कैसे बदल सकते हैं किसानों की आय?
अगर किसान केवल कच्चा माल बेचता रहेगा, तो सबसे बड़ा लाभ बाजार उठाएगा। लेकिन जिस दिन किसान अपनी उपज का प्रसंस्करण और सीधी मार्केटिंग शुरू करेगा, उसी दिन उसकी आर्थिक स्थिति बदलनी शुरू हो सकती है।

🎥 पूरी वीडियो देखें और अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

#किसान #खेती #गेहूं #MSP #MRP #FPO #Agriculture #ValueAddition #Farmer #IndianAgriculture #Kisan #Agribusiness

यदि यह पोस्ट किसान समूहों में अधिक शेयर और चर्चा के लिए है, तो मैं इसका एक अधिक विवाद पैदा करने वाला (debate-driven) कैप्शन भी लिख सकता हूँ।

🌾 100 किलो गेहूं उगाने वाला किसान कर्जदार... लेकिन उसी गेहूं से दलिया बेचने वाला व्यापारी अमीर क्यों? क्या समस्या खेती में है... या हमारी कृषि व्यवस्था में? किसान पूरे साल मेहनत करता है, जोखिम उठाता है, कर्ज लेकर खेती करता है और अंत में अपनी उपज कम दाम पर बेचने को मजबूर हो जाता है। वहीं वही गेहूं जब दलिया, आटा, सूजी या मैदा बनकर पैकेट में बाजार पहुंचता है, तो उसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है। आखिर किसान को उसकी मेहनत का उचित हिस्सा क्यों नहीं मिलता? इस वीडियो में जानिए- ✅ किसान की असली लागत क्या होती है? ✅ मंडी से बाजार तक कीमत कई गुना कैसे बढ़ जाती है? ✅ MSP और MRP में क्या अंतर है? ✅ Value Addition क्या है और इससे सबसे ज्यादा कमाई कौन करता है? ✅ FPO, प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग कैसे बदल सकते हैं किसानों की आय? अगर किसान केवल कच्चा माल बेचता रहेगा, तो सबसे बड़ा लाभ बाजार उठाएगा। लेकिन जिस दिन किसान अपनी उपज का प्रसंस्करण और सीधी मार्केटिंग शुरू करेगा, उसी दिन उसकी आर्थिक स्थिति बदलनी शुरू हो सकती है। 🎥 पूरी वीडियो देखें और अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। #किसान #खेती #गेहूं #MSP #MRP #FPO #Agriculture #ValueAddition #Farmer #IndianAgriculture #Kisan #Agribusiness यदि यह पोस्ट किसान समूहों में अधिक शेयर और चर्चा के लिए है, तो मैं इसका एक अधिक विवाद पैदा करने वाला (debate-driven) कैप्शन भी लिख सकता हूँ।

Mariahu, Jaunpur | Jul 4, 2026

दूल्हा आजाद बिंद हत्याकांड मामले में ग्राम वासियों ने खोला पोल

दूल्हा आजाद बिंद हत्याकांड मामले में ग्राम वासियों ने खोला पोल

Mariahu, Jaunpur | Jul 4, 2026