
रामगोविंद चौधरी जी से जुड़ा एक किस्सा आज भी मेरे दिल में उसी तरह जिंदा है…
वर्ष था 2016। चौधरी साहब उस समय उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री थे। उस वक्त लखनऊ में था और कोई खास काम भी नहीं था, बस मन में एक इच्छा हुई कि मंत्री जी से मिल लूं। सो सरकारी आवास पहुंच गया।
बाहर सिक्योरिटी और कुछ कार्यकर्ता मौजूद थे। मैंने पूछा—मंत्री जी से मुलाकात हो सकती है?
जवाब मिला—“अभी मंत्री जी व्यस्त हैं, करीब दो घंटे बाद मुलाकात होगी।”
सोचा, कोई बात नहीं… लेकिन मन नहीं माना। जाने से पहले एक छोटी-सी पर्ची लिखकर वहां मौजूद सज्जन को दी और कहा—
“अब मुलाकात नहीं हो पाएगी, मुझे जाना है। बस यह पर्ची मंत्री जी तक पहुंचा दीजिएगा।”
वह सज्जन भी बहुत अच्छे इंसान थे। उन्होंने बिना किसी सवाल के वह पर्ची तुरंत अंदर पहुंचा दी।
मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि उस छोटी-सी पर्ची में लिखे कुछ शब्द इतना बड़ा असर करेंगे।
कुछ ही देर बाद चौधरी साहब खुद बाहर आए।
मुझे देखते ही गले लगा लिया।
उसके बाद जो बातें हुईं, जो अपनापन मिला और जिस आत्मीयता से उन्होंने मुझे अपना समझकर बातचीत की, उसे शब्दों में लिखना शायद उस रिश्ते की गरिमा को छोटा करना होगा। कुछ बातें ऐसी भी हैं, जिन्हें मैं सोशल मीडिया पर साझा नहीं कर सकता।
लेकिन उस दिन एक बात दिल में हमेशा के लिए उतर गई—
रिश्ते पद से नहीं, दिल से निभाए जाते हैं। और रिश्ते निभाना कोई सीखे, तो रामगोविंद चौधरी साहब से सीखे।
अब शायद आप सोच रहे होंगे कि आखिर उस पर्ची में ऐसा क्या लिखा था?
सच कहूं तो उसमें कोई बड़ी बात नहीं थी। मैंने बस लिखा था—
“सहसवान विधानसभा क्षेत्र के वजीरपुर गांव से आया हूं… स्वर्गीय बाबूजी भगवान सिंह जी का सुपौत्र हूं और बस आपका आशीर्वाद लेने आया था।”
बस इतने शब्द…
लेकिन उन शब्दों में मेरे बाबा और चौधरी साहब के पुराने रिश्ते की पूरी कहानी छिपी थी। मेरे बाबा भगवान सिंह जी से चौधरी साहब के बहुत आत्मीय संबंध थे।
शायद यही वजह थी कि मंत्री का पद, सरकारी आवास और सुरक्षा की सारी औपचारिकताएं एक पल में पीछे छूट गईं और सामने रह गया तो सिर्फ एक पुराना रिश्ता और अपनापन।
आज चौधरी साहब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जब भी वह दिन याद आता है, आंखें नम हो जाती हैं।
कुछ मुलाकातें जिंदगी में कुछ मिनटों की होती हैं, लेकिन उनकी याद पूरी जिंदगी साथ चलती है।
चौधरी साहब,
आपसे मिली वह आत्मीयता और वह गले लगाना आज भी मेरे लिए किसी अनमोल विरासत से कम नहीं है।
आपको विनम्र नमन।
आपकी याद हमेशा दिल में रहेगी। 🙏
Budaun, Budaun | Oct 1, 2026