
प्याज लगी रुलाने महीने भर में तीन गुना बढ़े दाम*
*विदेशों की डिमांड पूरी करने नासिक में खरीदी का असर*
एक महीने में प्याज की कीमतों में आए तेज उछाल ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। जिले में उत्पादन भरपूर होने के बावजूद बाजार में दाम लगातार चढ़ रहे हैं। किसान पहले ही सस्ते में फसल बेच चुके हैं जबकि अब महंगाई का पूरा बोझ आम उपभोक्ता उठा रहा है।
रीवा जिले में इस वर्ष प्याज की पैदावार उम्मीद से बेहतर रही। अमरपाटन, रामनगर, नागौद, रामपुर बाघेलान, मझगवां, उचेहरा, सिरहपुर, बिरसिंहपुर और आसपास के क्षेत्रों में किसानों ने बड़े रकबे में प्याज की खेती की। फसल भी अच्छी हुई, लेकिन खुदाई के समय किसानों को 10 से 12 रुपए प्रति किलो के भाव पर ही अपनी उपज बेचनी पड़ी।
अब वही प्याज थोक बाजार में 25 से 30 रुपए और फुटकर बाजार में 35 से 40 रुपए प्रति किलो तक बिक रही है। पिछले पंद्रह से बीस दिनों में कीमतों में आई इस तेज बढ़ोतरी ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि यदि बाजार में यही स्थिति बनी रही तो जुलाई के अंत तक प्याज 45 से 50 रुपए प्रति किलो तक पहुंच सकती है।
थोक व्यापारी सुनील तिवारी बताते हैं कि विदेशों की डिमांड पूरी करने के लिए नासिक में खरीदी चल रही है। प्याज के दाम बढ़ने का एक कारण यह भी है।
*खेत से सीधे खरीद ले गए व्यापारी*
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार मई और जून में ही बाहर से आए बड़े व्यापारियों ने गांव-गांव पहुंचकर किसानों से सीधे प्याज खरीद ली थी। अधिकांश किसानों के पास भंडारण की सुविधा नहीं होने के कारण उन्होंने तत्काल नकदी की जरूरत में फसल बेच दी। अब वही स्टॉक ऊंचे दामों पर बाजार में उतारा जा रहा है। इससे सबसे अधिक लाभ बिचौलियों और बड़े व्यापारियों को मिल रहा है।
*किसान-उपभोक्ता घाटे में*
विडंबना यह है कि जिस किसान ने महीनों मेहनत कर फसल तैयार की, उसे उचित मूल्य नहीं मिला। दूसरी ओर अब उपभोक्ता उसी प्याज के लिए तीन गुना तक कीमत चुका रहा है। यानी उत्पादन से लेकर उपभोग तक की पूरी श्रृंखला में सबसे अधिक फायदा बीच के कारोबार को मिला, जबकि किसान और ग्राहक दोनों नुकसान में रहे।
*क्यों बदला बाजार का रुख*
केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक के लिए प्याज खरीद का मूल्य बढ़ाकर 2,125 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है। पहले यह 1,875 रुपए प्रति क्विंटल था। नई दर लागू होने के बाद सरकारी खरीद की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि बाजार की जानकारी का मानना है कि इससे खुले बाजार में उपलब्धता पर भी कुछ असर पड़ा है।
रीवा जिले से प्रतिदिन कई ट्रकों में प्याज बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल भेजी जा रही है। स्थानीय बाजार में उपलब्धता घटने का असर खुदरा कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। व्यापारियों का कहना है कि बाहर की मांग बढ़ने से स्थानीय बाजार में भी दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं।