
बैंक कर्मचारी हड़ताल पर क्यों? बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के बीच एक बैंकर ने अपनी कार्यस्थितियों और परेशानियों को लेकर गंभीर बातें साझा की हैं।
उनके अनुसार, कर्मचारियों पर लगातार टारगेट, रिकवरी और NPA रोकने का दबाव रहता है।
सुबह करीब 9:45 बजे ड्यूटी शुरू होने के बाद कई कर्मचारी रात 8–9 बजे तक काम करते हैं।
स्टाफ की कमी के कारण कई शाखाओं में सिर्फ 2–3 कर्मचारियों के भरोसे पूरा बैंक संचालित होने का दावा किया गया है।
छुट्टी या बीमारी के बावजूद काम पर आने का दबाव होने की बात भी बैंकर ने कही।
मासिक लोन, डिपॉजिट, NPS और सरकारी योजनाओं के लक्ष्यों को लेकर लगातार दबाव की शिकायत की गई है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और फोन कॉल के दौरान टारगेट पूरा नहीं होने पर सार्वजनिक रूप से डांटने और अपमानित करने का आरोप लगाया गया।
रिकवरी के दौरान ग्राहकों से विवाद, अभद्र भाषा और मानसिक तनाव का सामना करने की बात कही गई है।
बैंकर के मुताबिक, बैंकिंग के साथ चुनाव ड्यूटी और अन्य सरकारी कार्यों का अतिरिक्त बोझ भी कर्मचारियों पर आता है।
जटिल KYC, ऑनलाइन शिकायतों और तकनीकी समस्याओं के कारण ग्राहकों की भीड़ तथा काम का दबाव बढ़ने का दावा है।
शनिवार-रविवार को भी लंबित काम निपटाने के लिए शाखा आने की स्थिति का उल्लेख किया गया है।
बैंकर ने कहा कि लगातार तनावपूर्ण माहौल का कर्मचारियों की सेहत पर भी असर पड़ रहा है और ट्रांसफर-पोस्टिंग में भेदभाव की शिकायतें भी हैं।
बैंकर का कहना है कि हड़ताल के पीछे वेतन के साथ-साथ सम्मानजनक कार्यस्थल, पर्याप्त स्टाफ और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग भी अहम है।