
*जिला परिषद वार्ड-29 थौना में रिकाउंटिंग विवाद : कानून सबके लिए समान होना चाहिए*
हिमाचल प्रदेश पंचायती राज चुनाव 2026 के दौरान एक ओर जहां पंचायत स्तर पर मतगणना में त्रुटियों और लापरवाही के मामलों में अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर *जिला परिषद वार्ड-29 थौना* से प्रत्याशी *श्रीमती रजनी ठाकुर* द्वारा की गई रिकाउंटिंग की मांग स्वीकार न किए जाने से कई कानूनी और प्रशासनिक प्रश्न खड़े हो गए हैं।
हाल ही में शिमला जिले में पंचायत चुनाव के दौरान प्रक्रियागत लापरवाही पाए जाने पर चार मतदान अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया था।
लेकिन प्रश्न यह है कि यदि पंचायत चुनावों में *मतगणना और पुनर्मतगणना* (Recounting) के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, तो जिला परिषद चुनाव में उन प्रावधानों का पालन क्यों नहीं किया गया?
📝🧑🎓*कानून क्या कहता है?*
हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (निर्वाचन) नियम, 1994 के नियम 79 (Rule 79 – Recount of Votes) में स्पष्ट प्रावधान है कि:
1. मतगणना पूरी होने और परिणाम पत्रक तैयार होने के बाद उम्मीदवार, उसका चुनाव अभिकर्ता या गणना अभिकर्ता लिखित रूप में पुनर्मतगणना की मांग कर सकता है।
2. मांग के साथ कारण (Grounds) लिखित रूप में प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
3. जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) अथवा रिटर्निंग अधिकारी उस आवेदन पर विचार करेगा।
4. अधिकारी आवेदन को पूर्ण या आंशिक रूप से स्वीकार कर सकता है अथवा यदि उसे आवेदन निराधार या अनुचित प्रतीत हो तो कारणों सहित अस्वीकार कर सकता है।
अर्थात कानून उम्मीदवार को रिकाउंटिंग मांगने का अधिकार देता है और अधिकारी को उस मांग पर विधिसम्मत निर्णय लेने का दायित्व सौंपता है।
*जिला परिषद वार्ड-29 थौना का मामला*
यदि श्रीमती रजनी ठाकुर द्वारा नियम 79 के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लिखित आवेदन प्रस्तुत किया गया था, तो यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए कि:
1. आवेदन स्वीकार क्यों नहीं किया गया?
2. क्या आवेदन को लिखित आदेश द्वारा अस्वीकार किया गया?
3. अस्वीकृति के क्या कारण दर्ज किए गए?
4. क्या उम्मीदवार को आदेश की प्रति उपलब्ध कराई गई?
लोकतंत्र में पारदर्शिता केवल मतदान तक सीमित नहीं होती, बल्कि मतगणना और परिणाम घोषणा की प्रक्रिया भी उतनी ही पारदर्शी होनी चाहिए।
🧑⚖️📝*आगे का कानूनी विकल्प*
हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 163 के अनुसार कोई भी मतदाता अथवा संबंधित पक्ष परिणाम प्रकाशित होने के बाद निर्धारित अवधि में चुनाव याचिका (Election Petition) प्रस्तुत कर सकता है। चुनाव विवादों का निपटारा अधिनियम के अध्याय-XI तथा निर्वाचन नियमों के अनुसार किया जाता है।
इसलिए यदि किसी प्रत्याशी को यह विश्वास है कि मतगणना में त्रुटि हुई है अथवा रिकाउंटिंग की मांग को अनुचित रूप से अस्वीकार किया गया है, तो वह चुनाव याचिका के माध्यम से न्याय प्राप्त करने का प्रयास कर सकता है।
*🎯निष्कर्ष*
लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति जनता का विश्वास है। यदि पंचायत चुनाव में एक नियम लागू होता है तो वही नियम जिला परिषद चुनाव में भी समान रूप से लागू होना चाहिए। चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता केवल निष्पक्ष मतदान से नहीं, बल्कि निष्पक्ष मतगणना और आवश्यक होने पर पारदर्शी रिकाउंटिंग से सुनिश्चित होती है।
प्रश्न किसी उम्मीदवार की हार या जीत का नहीं है, बल्कि चुनाव प्रक्रिया में जनता के विश्वास का है। यदि कानून में रिकाउंटिंग का प्रावधान है, तो उसके अनुपालन पर उठे प्रश्नों का उत्तर भी कानून और पारदर्शिता के आधार पर दिया जाना चाहिए।
Solan, Solan | Jun 2, 2026