
अंधविश्वास नहीं, मानवता को चुना | SA News Chhattisgarh
मध्यप्रदेश | 09-07-2026: विदिशा जिले के गंजबासौदा तहसील के ग्राम उकायला में मानवता और परोपकार की एक प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली। संत रामपाल जी महाराज जी के अनुयायी भगत हल्कई सिलावट जी के निधन के उपरांत उनके परिजनों ने समाज को नई दिशा देने वाला निर्णय लेते हुए देहदान किया। परिवार ने पारंपरिक रूढ़ियों और अंधविश्वासों से ऊपर उठकर उनका पार्थिव शरीर अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय को सौंप दिया, जिससे मेडिकल छात्रों को अध्ययन एवं शोध कार्य में सहायता मिल सके।
देहदान के इस पुनीत कार्य के सम्मान में मेडिकल कॉलेज द्वारा दिवंगत हल्कई सिलावट जी को "गार्ड ऑफ ऑनर" देकर अंतिम विदाई दी। यह क्षण उपस्थित लोगों के लिए भावुक होने के साथ-साथ प्रेरणादायक भी रहा। दिवंगत की धर्मपत्नी पूना बाई दासी और पुत्र जगदीश दास ने बताया कि यह निर्णय उन्होंने अपने गुरु संत रामपाल जी महाराज जी की शिक्षाओं से प्रेरित होकर लिया है।
संत रामपाल जी महाराज जी अपने सत्संगों में मानव सेवा, परोपकार और समाजहित के कार्यों को सबसे बड़ा धर्म बताते हैं। उनकी प्रेरणा से हजारों अनुयायी रक्तदान, देहदान, नशामुक्ति, दहेज मुक्त विवाह और अन्य जनकल्याणकारी कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने भी परिवार के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि देहदान चिकित्सा शिक्षा और वैज्ञानिक शोध के लिए अमूल्य योगदान है। ऐसे दान से भावी चिकित्सकों को बेहतर प्रशिक्षण मिलता है, जिसका लाभ अंततः पूरे समाज को मिलता है।
दिवंगत हल्कई सिलावट जी का देहदान यह संदेश देता है कि सच्ची मानवता जीतें जी नेक कर्म व मृत्यु के बाद भी दूसरों के काम आने में है। संत रामपाल जी महाराज जी की प्रेरणा से किया गया यह कार्य समाज के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।
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