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कहा जाता है गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है… फिर आज इन सड़कों और मैदानों में सड़ती हुई गायों की लाशों पर किसकी आत्मा नहीं कांपी? जिन्होंने गाय के नाम पर राजनीति की, वोट मांगे, भावनाएं भड़काईं… आज वही लोग खामोश हैं। न कोई जवाब, न कोई जिम्मेदारी, न कोई आंसू। अगर गौमाता सिर्फ चुनावी भाषणों तक सीमित है, तो यह सिर्फ गाय नहीं… इंसानियत की भी मौत है। गौभक्ति अगर सच में होती, तो हजारों गायें यूँ तड़प-तड़प कर मरने के लिए नहीं छोड़ी जातीं। वोट के समय ‘गौमाता’, और बाकी समय लावारिस? देश यह पाखंड देख रहा है।”#apsgurjar #bharat