
झुमरी तिलैया में जैन समाज के प्रवचन: कृतज्ञता महान व्यक्तित्व की पहचान – पंडित अभिषेक शास्त्री
झुमरी तिलैया के नया मंदिर में आयोजित प्रवचन के दौरान पंडित अभिषेक शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि कृतज्ञता महान व्यक्तित्व की पहचान है। उन्होंने कहा कि कृतज्ञता वह दिव्य भावना है, जो मनुष्य को विनम्र, संवेदनशील और महान बनाती है। यह केवल "धन्यवाद" कहने तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन में मिले उपकारों को सदैव स्मरण रखने का संस्कार है। जिस व्यक्ति के हृदय में कृतज्ञता होती है, वह कभी अहंकार का शिकार नहीं होता।उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में अनेक लोगों का ऋणी होता है। माता-पिता जीवन देते हैं, गुरु ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं, किसान अन्न उपजाता है, सैनिक देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बाज़ी लगाता है और प्रकृति बिना किसी स्वार्थ के वायु, जल एवं जीवन उपलब्ध कराती है। इन सभी के प्रति कृतज्ञ होना प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक दायित्व है।पंडित शास्त्री ने भारतीय संस्कृति के उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान निषादराज गुह, शबरी और हनुमान के सहयोग को जीवनभर सम्मान दिया। वहीं भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा को कभी नहीं भुलाया। ये प्रसंग बताते हैं कि वास्तविक महानता शक्ति या वैभव में नहीं, बल्कि कृतज्ञ हृदय में निहित होती है।उन्होंने कहा कि दैनिक जीवन में भी यदि कोई शिक्षक सही मार्ग दिखाए, मित्र कठिन समय में साथ दे या कोई अनजान व्यक्ति सहायता करे, तो उसके प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करना ही सच्ची मानवता है। उपकार को भूल जाना कृतघ्नता है, जबकि उसे जीवनभर याद रखना श्रेष्ठ चरित्र का परिचायक है।उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे सदैव ईश्वर, माता-पिता, गुरुजनों, प्रकृति और समाज के प्रति आभार व्यक्त करें। यही भावना व्यक्ति को श्रेष्ठ, समाज को सशक्त और राष्ट्र को समृद्ध बनाती है। उन्होंने कहा कि धन से नहीं, बल्कि कृतज्ञता से मनुष्य महान बनता है।जैन समाज के मीडिया प्रभारी नवीन जैन एवं राजकुमार अजमेरा ने बताया कि पंडित अभिषेक शास्त्री प्रतिदिन नया मंदिर में जिनवाणी शास्त्र का वाचन करते हैं, जिसका बड़ी संख्या में श्रद्धालु लाभ उठा रहे हैं।