
गांव से निकलकर हांगकांग में जीता गोल्ड, अब देश के लिए महिला पहलवान तैयार करना चाहती हैं गोरखपुर की अंशिका यादव
गोरखपुर की 17 वर्षीय पहलवान ने अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण पदक, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल कर चुकी हैं सम्मानित; अंशिका को देखकर गांव की 15 से 20 लड़कियां भी कुश्ती में बना रहीं पहचान
गोरखपुर। मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के दम पर गांव की गलियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय कुश्ती के मैदान तक पहुंचने वाली गोरखपुर की अंशिका यादव आज दूसरी लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं। हांगकांग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने देश का नाम रोशन किया। अब उनका सपना गांव की लड़कियों को कुश्ती में आगे बढ़ाना और उन्हें आत्मरक्षा के लिए सक्षम बनाना है।
गोरखपुर के बांसगांव थाना क्षेत्र के जमोली बाजार की रहने वाली 17 वर्षीय अंशिका यादव का कुश्ती से जुड़ाव उस समय शुरू हुआ, जब वह पांचवीं कक्षा में पढ़ती थीं। उनके स्कूल में कबड्डी प्रतियोगिता के दौरान एक छोटे दंगल का आयोजन किया गया था। उस समय अंशिका को कुश्ती के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से शिक्षकों को प्रभावित कर दिया। शिक्षकों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें कुश्ती में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
पिता की सहमति के बाद शुरू हुआ कुश्ती का सफर
शुरुआत में अंशिका के पिता मुरलीधर यादव एक लड़की के पहलवानी करने को लेकर तैयार नहीं थे। हालांकि, शिक्षकों के समझाने के बाद उन्होंने बेटी को मौका देने का फैसला किया। इसके बाद अंशिका घर से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित अखाड़े में अभ्यास करने पहुंचीं। जब पिता ने खुद बेटी का प्रदर्शन देखा, तो उन्होंने भी उसे आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
अंशिका ने अखाड़े में लगातार अभ्यास किया। कुश्ती के प्रति उनकी रुचि और प्रतिभा को देखते हुए पिता ने उनका दाखिला स्पोर्ट्स कॉलेज में कराया। यहां उन्हें पढ़ाई के साथ कुश्ती की बेहतर ट्रेनिंग मिली। कोच के मार्गदर्शन, अनुशासन और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने पहले स्थानीय स्तर पर, फिर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
हांगकांग में गोल्ड जीतकर बढ़ाया देश का मान
सीमित संसाधनों के बावजूद अंशिका ने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। लगातार मेहनत के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर खेलने के अवसर मिले। अब तक वह आठ बार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं। इसके बाद हांगकांग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
उनकी इस उपलब्धि के लिए उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी उन्हें सम्मानित कर चुकी हैं। फिलहाल अंशिका JSW की स्पॉन्सरशिप के तहत बेंगलुरु में रहकर अपनी कुश्ती को और बेहतर बनाने के लिए अभ्यास कर रही हैं।
अंशिका को देखकर कुश्ती से जुड़ीं गांव की 15 से 20 लड़कियां
अंशिका यादव का कहना है कि वह अपने गांव और आसपास की लड़कियों को कुश्ती के क्षेत्र में आगे बढ़ते देखना चाहती हैं। उनका मानना है कि खेल के माध्यम से लड़कियां अपनी अलग पहचान बना सकती हैं और आत्मरक्षा के गुण भी सीख सकती हैं।
उन्होंने बताया कि वह अपने गांव की पहली लड़की थीं, जिन्होंने कुश्ती में कदम रखा था। आज उन्हें देखकर गांव की करीब 15 से 20 लड़कियां भी इस खेल से जुड़ चुकी हैं। ये लड़कियां प्रशिक्षण लेकर आगे बढ़ने और प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं।
पढ़ाई के साथ खेल पर भी ध्यान, अब सीनियर स्टेट चैंपियनशिप की तैयारी
अंशिका यादव फिलहाल बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स की पढ़ाई कर रही हैं। पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाते हुए वह अपने अगले लक्ष्य की तैयारी में जुटी हैं। वह 23 अक्टूबर को गोरखपुर में आयोजित होने वाली सीनियर स्टेट चैंपियनशिप में हिस्सा लेने जा रही हैं।
अंशिका के पिता मुरलीधर यादव रेलवे में कार्यरत हैं, जबकि उनकी मां मालती देवी गृहिणी हैं। चार भाई-बहनों में सबसे छोटी अंशिका की बड़ी बहन प्रीति की शादी हो चुकी है और दूसरी बहन पूजा की शादी तय है। उनके भाई जितेंद्र यादव केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में जवान हैं।
गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने तक का अंशिका यादव का सफर बताता है कि सही मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग और निरंतर मेहनत से बड़े सपनों को साकार किया जा सकता है। अब उनकी कोशिश है कि जिस राह पर चलकर उन्होंने अपनी पहचान बनाई, उसी राह पर गांव की दूसरी बेटियां भी आगे बढ़ें और देश के लिए पदक जीतें।