
स्वच्छता के दावों पर सवाल, सरकारी दफ्तरों में खुलेआम गुटखा, पुड़िया और सिगरेट का सेवन,
पोरसा। एक ओर प्रशासन स्वच्छता अभियान चलाकर लोगों को साफ-सफाई और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का संदेश देता है, वहीं दूसरी ओर कुछ सरकारी कार्यालयों में कर्मचारी खुलेआम गुटखा, पुड़िया और सिगरेट का सेवन करते नजर आते हैं। इससे न केवल कार्यालयों का वातावरण प्रभावित होता है, बल्कि स्वच्छता अभियान की गंभीरता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
जानकारों का कहना है कि सरकारी दफ्तरों में तंबाकू और धूम्रपान की आदत से गंदगी फैलती है तथा कर्मचारियों और आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कई बार कार्यालय परिसरों में थूकने और धूम्रपान करने की शिकायतें भी सामने आती रहती हैं।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि प्रशासन वास्तव में स्वच्छता और स्वस्थ वातावरण को बढ़ावा देना चाहता है, तो सबसे पहले सरकारी कार्यालयों में ऐसे कृत्यों पर प्रभावी रोक लगानी होगी। लोगों ने संबंधित विभागों से कार्यालयों को नशामुक्त और स्वच्छ बनाने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है।
जनता की मांग है कि सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता और अनुशासन सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्रशासन का संदेश और उसकी कार्यशैली एक-दूसरे के अनुरूप दिखाई दें।