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आटा चक्की चलाने वाले पिता का सपना हुआ सच. सहरसा के शुभम बने BPSC अधिकारी, 831 रैंक लाकर बने ADTO गरीबी नहीं बनी बाधा, पिता की मेहनत, बड़े भाई का साथ और खुद के जुनून से शुभम ने रच दी सफलता की मिसाल। सहरसा - जिले के सौर बाजार प्रखंड अंतर्गत सुहथ पंचायत के हनुमान नगर चकला गांव से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर हौसला मजबूत हो तो सफलता कदम चूमती है। गांव के साधारण किसान और आटा चक्की चलाने वाले सुरेश कुमार साह ने अपनी मेहनत और संघर्ष से अपने बेटे को पढ़ाया-लिखाया, और आज उनका छोटा बेटा शुभम कुमार ने BPSC की परीक्षा में 831वीं रैंक हासिल कर अपर जिला परिवहन पदाधिकारी (ADTO) बनकर पूरे परिवार, पंचायत और जिले का नाम रोशन कर दिया है। शुभम बचपन से ही मेधावी छात्र रहे हैं। गांव के स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा लेने वाले शुभम हमेशा अपनी कक्षा में अव्वल आते थे। लोगों को उनके अंदर बचपन से ही एक अधिकारी की झलक दिखती थी, और उन्होंने इसे सच कर दिखाया। शिक्षा की बात करें तो शुभम ने वर्ष 2016 में गजाधर साहू उच्च विद्यालय, सौर बाजार से मैट्रिक पास किया। इसके बाद 2018 में एमएलटी कॉलेज, सहरसा से साइंस में इंटरमीडिएट किया। आगे उन्होंने पटना कॉलेज से 2021 में इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने JNU से हिंदी साहित्य में पोस्ट ग्रेजुएशन और फिर PhD की, जिसमें उनका शोध विषय मैथिली लोकगाथा गीत भगैत एक विश्लेषणात्मक अध्ययन रहा। शुभम की सफलता के पीछे उनके पिता के संघर्ष के साथ-साथ उनके बड़े भाई अभिषेक कुमार का भी बड़ा योगदान रहा, जो दो साल पहले BPSC पास कर 10+2 शिक्षक बने। बड़े भाई ने छोटे भाई की पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाई और पिता के साथ मिलकर उसे इस मुकाम तक पहुंचाया। शुभम ने UPSC की तैयारी के दौरान ही अपने पहले प्रयास में BPSC परीक्षा पास कर यह साबित कर दिया कि लक्ष्य स्पष्ट हो तो सफलता दूर नहीं होती। उनकी सफलता आज आसपास के सैकड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। शुभम की इस उपलब्धि पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों सहित कई गणमान्य लोगों ने उन्हें बधाई दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सफलता पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है और आने वाली पीढ़ी के लिए एक नई दिशा दिखाने वाली है। शुभम की सफलता के पीछे उनके माता-पिता का संघर्ष तो है ही, साथ ही उनके जीवन में प्रेरणा की सबसे बड़ी रोशनी बने उनके शिक्षक स्वर्गीय उमेश सर, बड़े भाई व शिक्षक नागेंद्र कुमार और पूर्व बीडीओ वर्तमान विधायक डॉ. गौतम कृष्ण का मार्गदर्शन भी रहा, जिन्होंने हर कदम पर उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

Kahara, Saharsa | Jun 21, 2026

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बिहार सरकार ने उनकी मंगेतर श्रेया रॉय को 21 लाख का चेक सौंपा था क्योंकि वो आधिकारिक रूप से उनकी पत्नी बन चुकी थीं, लेकिन

श्रेया को न श्राद्ध कर्म की चिंता थी, न ही कुछ और उन्हें चिंता थी सिर्फ 21 लाख की और दुख की घड़ी में शहीद शुभम कुमार के माता पिता को छोड़कर मायके चली गई।

इसपर खूब बहस भी हुई थी, लेकिन अब 

सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष संदीप तिवारी ने शुभम के माता पिता को 1.5 करोड़ का चेक सौंपा है।

कुछ दिनों पहले असम के जोरहाट में एक वायुसेना का विमान क्रैश हुआ था, जिसमें बिहार के लेफ्टीनेंट शुभम कुमार शहीद हो गए थे। बिहार सरकार ने उनकी मंगेतर श्रेया रॉय को 21 लाख का चेक सौंपा था क्योंकि वो आधिकारिक रूप से उनकी पत्नी बन चुकी थीं, लेकिन श्रेया को न श्राद्ध कर्म की चिंता थी, न ही कुछ और उन्हें चिंता थी सिर्फ 21 लाख की और दुख की घड़ी में शहीद शुभम कुमार के माता पिता को छोड़कर मायके चली गई। इसपर खूब बहस भी हुई थी, लेकिन अब सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष संदीप तिवारी ने शुभम के माता पिता को 1.5 करोड़ का चेक सौंपा है।

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