
किसी वहम में मत रहना मेरे भाई...
यह गांधी युग नहीं, मोदी जी का ‘अमृतकाल’ चल रहा है! जहाँ गांधी जी के 3 बंदरों को हमारे देश के ‘3 अंधभक्तों’ ने पीछे छोड़ दिया है—
👀 पहला अंधभक्त (अंधा):
महँगाई आसमान छू रही है, सिलेंडर 1000 पार है, पर भाई साहब को ज़मीन पर कुछ नहीं दिखता। इन्होंने आँखों पर ऐसा परमानेंट ‘भक्ति चश्मा’ पहना है कि इन्हें सिर्फ और सिर्फ ‘विज़न’ ही दिखता है!
👂 दूसरा अंधभक्त (बहरा):
युवाओं की चीखें, किसानों का दर्द और जनता की आहें इनके कानों तक कभी नहीं पहुँचतीं। इनके कान सिर्फ लाउडस्पीकर पर बजने वाले ‘मन की बात’ और चुनावी जुमलों के लिए ही ट्यून हैं!
🤐 तीसरा अंधभक्त (गूंगा):
देश का कुछ भी बिक जाए, पेपर लीक हो जाएं या संविधान हिल जाए... इनकी जुबान से एक शब्द नहीं निकलेगा। हाँ, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के फॉरवर्डेड मैसेज भेजने और सवाल पूछने वालों को ‘गद्दार’ बोलने के लिए इनकी जुबान तुरंत खुल जाती है!
कमाल का अमृतकाल है साहब... जहाँ आँख, कान और जुबान तीनों पर ‘विकास’ का परमानेंट ताला लगा है! 🇮🇳🤦♂️
👇 आपकी क्या राय है? क्या आपके आस-पास भी ऐसे ‘त्रिदेव’ पाए जाते हैं? कमेंट में नाम मत बताना, बस इशारा कर देना! 😉
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