
पूर्ण गुरु की क्या है पहचान? | SA News Chhattisgarh
29-07-2026: भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान, विवेक और आत्मिक उन्नति का आधार माना गया है। शास्त्रों के अनुसार मनुष्य का जीवन तभी सार्थक होता है, जब उसे एक योग्य गुरु का मार्गदर्शन प्राप्त हो। गुरु केवल सांसारिक शिक्षा ही नहीं देता, बल्कि सत्य, धर्म और आत्मज्ञान का मार्ग भी दिखाता है। अब, सिर्फ गुरू ही नहीं बल्कि पूर्णगुरू असली भक्ति-मुक्ति के दाता हैं, यह जानना जरूरी है।
भगवद्गीता- अध्याय 4 श्लोक 34 में उल्लेख है-
"तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया, उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः।
अर्थात तत्त्वदर्शी ज्ञानी गुरु के पास विनम्रता, सेवा और जिज्ञासा के साथ जाओ, वे तुम्हें सत्य ज्ञान प्रदान करेंगे।
संत गरीबदास जी महाराज अपनी वाणी में पूर्णगुरू की पहचान बता रहे हैं कि वह चारों वेदों, छः शास्त्रों, अठारह पुराणों आदि सभी ग्रंथों का पूर्ण जानकार होगा।
सतगुरु के लक्षण कहूं, मधूरे बैन विनोद।
चार वेद षट शास्त्र, कहै अठारा बोध।।
कबीर साहेब जी गुरु की महिमा बताते हुए कहते हैं-
"गुरु गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पाय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविन्द दियो बताय।।"
अर्थात यदि गुरु और भगवान दोनों सामने हों, तो पहले गुरु को प्रणाम करना चाहिए, क्योंकि गुरु ही भगवान तक पहुँचने का मार्ग बताते हैं।
जो पूर्ण सतगुरु होगा उसमें चार मुख्य गुण होते हैं:- गुरू के लक्षण चार बखाना, प्रथम वेद शास्त्र को ज्ञाना।
दूजे हरि भक्ति मन कर्म बानी, तीसरे समदृष्टि कर जानी।
चौथे वेद विधि सब कर्मा, यह चार गुरु गुण जानो मर्मा।
कबीर सागर के अध्याय ‘‘जीवधर्म बोध‘‘ पृष्ठ 1960 पर ये वाणियां अंकित हैं। उपरोक्त प्रमाणों के अलावा मुण्डकोपनिषद, श्वेताश्वर उपनिषद्- कबीर बीजक एवं संतों की वाणियों में पूर्णगुरू के संबंध में प्रमाण मिलते हैं।
इन सभी शास्त्रीय प्रमाणों, संतों की वाणियों का सार है कि मनुष्य को ऐसे पूर्णगुरु की शरण ग्रहण करनी चाहिए जो शास्त्रों का ज्ञाता और मोक्षमार्ग का जानकार हो। वर्तमान में वह पूर्णगुरू संत रामपाल जी महाराज हैं, जिनसे सत्भक्ति लेकर इसी मनुष्य जीवन में मोक्ष प्राप्तकर लख चौरासी से मुक्ति पा सकते हैं।
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