
राजस्थान मीडिया एसोसिएशन ऑफ इंडिया का पत्रकार जन-कल्याण संदेश...
अगर आप पत्रकार है और आपके खिलाफ कोई झूठी एफआईआर हुई है तो आप प्रमाणित प्रति इस नंबर पर व्हाट्सएप करें..,8949375224
पत्रकार को कवरेज से रोकना, धमकाना या उसके काम में बाधा डालना गंभीर मामला हो सकता है
सभी पत्रकार साथियों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी जानकारी
1 जुलाई 2024 से देश में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 लागू है और IPC के स्थान पर नए आपराधिक कानून प्रभावी हैं। �
India Code
यदि कोई व्यक्ति पत्रकार को जनहित की खबर की कवरेज करने से रोकता है, रास्ता रोकता है, धमकाता है, मारपीट करता है या कैमरा/उपकरण को नुकसान पहुंचाता है, तो घटना की परिस्थितियों के अनुसार BNS की विभिन्न धाराएं लागू हो सकती हैं।
🔴 1. कवरेज में बाधा डालना
BNS 126 — सदोष अवरोध (Wrongful Restraint)
BNS 127 — सदोष परिरोध (Wrongful Confinement)
BNS की धारा 126 वास्तव में किसी व्यक्ति को उस दिशा में जाने से स्वेच्छा से रोकने से संबंधित है, जबकि धारा 127 गलत तरीके से किसी व्यक्ति को सीमित करने से संबंधित है। �
India Code
नोट: BNS 221 लोक सेवक को उसके कर्तव्य से रोकने से संबंधित है; हर पत्रकार पर यह धारा स्वतः लागू नहीं होती। इसलिए FIR में धाराएं घटना के तथ्यों और पुलिस/कानूनी सलाह के अनुसार लगनी चाहिए।
📹 2. कैमरा, मोबाइल या अन्य उपकरण को नुकसान पहुंचाना
परिस्थिति के अनुसार BNS 324 (रिष्टि/संपत्ति को नुकसान) जैसी धाराएं लागू हो सकती हैं। चोरी, छीनाझपटी या आपराधिक न्यास भंग जैसे मामलों में संबंधित अन्य धाराएं भी तथ्यों के आधार पर देखी जा सकती हैं।
⚠️ 3. गाली-गलौज, धमकी या मारपीट
BNS 351 — आपराधिक धमकी
BNS 352 — जानबूझकर अपमान
BNS 115 — स्वेच्छा से चोट पहुंचाना
गंभीर चोट की स्थिति में संबंधित कठोर प्रावधान लागू हो सकते हैं।
⚖️ 4. FIR में घटना स्पष्ट रूप से लिखवाएं
उदाहरण:
“मैं ______ समाचार पत्र/न्यूज़ चैनल का ______ क्षेत्र का पत्रकार हूं। मैं जनहित में समाचार का कवरेज कर रहा था। तभी आरोपी ______ ने मुझे कवरेज करने से रोका तथा मेरे साथ गाली-गलौज/धमकी/मारपीट की और मेरे कैमरे/मोबाइल/अन्य उपकरण को नुकसान पहुंचाने या रिकॉर्डिंग मिटाने का प्रयास किया। घटना के संबंध में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उचित कानूनी धाराओं में कार्रवाई की जाए।”
📢 पत्रकार साथियों से अपील
अपना प्रेस कार्ड, पहचान और उपलब्ध फोटो/वीडियो सुरक्षित रखें। घटना होने पर गवाहों एवं साक्ष्यों को सुरक्षित करें और पुलिस में तथ्यात्मक शिकायत दें।
किसी भी घटना में धाराएं अपने-आप तय नहीं होतीं—पुलिस जांच और घटना के वास्तविक तथ्यों के आधार पर उचित धाराएं निर्धारित करती है। विशेष रूप से IT Act की धारा 66E निजी क्षेत्र की तस्वीर/वीडियो को बिना सहमति कैप्चर/प्रकाशित/ट्रांसमिट करने से संबंधित है, जबकि धारा 67 अश्लील सामग्री के इलेक्ट्रॉनिक प्रकाशन से संबंधित है; इसलिए इन्हें हर वीडियो डिलीट कराने की घटना पर स्वतः लागू बताना सही नहीं होगा।
पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान—लोकतंत्र की मजबूती
पत्रकार एकता जिंदाबाद।
जनहित की पत्रकारिता जिंदाबाद।
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Ladpura, Kota | Oct 5, 2026