
➡️ सफलता की कहानी
➡️ डेयरी फार्मिंग से आत्मनिर्भर बने बलवीर सिंह, पशुपालन से समृद्धि की ओर कदम
➡️ आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना बनी तरक्की की सीढ़ी
जिला सागर के देवरी विकासखंड के ग्राम बिजौरा खामखेड़ा निवासी 30 वर्षीय बलवीर सिंह दांगी ने आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना का लाभ लेकर डेयरी फार्मिंग से अपनी आय में वृद्धि कर पशुपालन का आय का धंधा बनाया और आत्मनिर्भरता प्राप्त की। आज वह स्वयं के साथ साथ अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। शुद्ध दूध की कमी और मिलावट की चिंता से प्रेरित होकर जून 2025 में उन्होंने योजना के अंतर्गत 5 उन्नत नस्ल की मुर्रा भैंसों से डेयरी की शुरुआत की। आज रोजाना 30 लीटर दूध की सप्लाई के साथ उनकी मासिक बचत 16 हजार रुपये से अधिक हो गई है। गोबर गैस, जैविक खाद और गौमूत्र से अतिरिक्त आय अर्जित कर बलवीर सिंह ने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं।
बलवीर सिंह आज अपने डेयरी फार्म के बिजनेस के जरिए रोजाना लोगों को भैंस का शुद्ध दूध पिला रहे हैं। बलवीर के मन में हमेशा ऐसा कुछ काम करने का था, जो ग्रामीण परिवेश से जुड़ा हो और समाज के लिए भी अच्छा हो। बलवीर के मुताबिक शुद्ध दूध की कमी और दूध में मिलावट की खबरें उन्हें काफी परेशान करती थीं। बस यहीं से उनके दिमाग में डेयरी फार्म खोलने का विचार आया, और फिर वो इसी रास्ते पर चल पड़े।
बलवीर सिंह की सफलता की कहानी तथा पशुपालकों के लिए उनका सुझाव
बलवीर सिंह बताते हैं कि मैंने अपने फार्म की शुरुआत जून 2025 में उन्नत नस्ल की पांच भैंसों से की थी। हमारा उद्देश्य है कि गांव में रह रहे लोग जो स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं और शुद्ध ताजा देशी भैंस के दूध की महत्व को समझते हैं उनके घर पर देशी भैंस का ताजा दूध डिलीवरी करने का कार्य शुरू किया। सरकार और बैंक के तरफ से म.प्र. शासन की योजना आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन डेयरी के बारे में पता चला। जिसकी पूर्ण जानकारी के लिये पास के पशु चिकित्सालय गौरझामर एवं विस्तृत जानकारी के लिये उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवायें जिला सागर की योजना शाखा में संपर्क किया।
बलवीर सिंह बताते हैं कि योजना के अंतर्गत 05 भैंसों के लिये आवेदन तैयार कराया एवं बैंक में भेज दिया गया। बैंक द्वारा ऑनलाइन सब्सिडी बुलाकर मेरा ऋण स्वीकृत कर दिया गया। कुल रकम 3,30,000/- में उन्नत नस्ल की मुर्रा भैंसें करनाल, हरयाणा से खरीदीं। जिनका दूध देने की क्षमता 9 लीटर प्रतिदिन था। भैंसों का बीमा कराकर एवं टीकाकरण कार्य भी कराया। इस प्रकार मैंने डेयरी का काम प्रारंभ किया। मेरे पास स्वयं की सिंचित भूमि है जिससे हरा-चारा एवं भूसा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है इससे मेरा खर्च बच जाता है। पशुपालन से दूध के साथ गोबर और गौमूत्र से भी आय होती है। गांव से 5 किलोमीटर दूर कस्बा गौरझामर में दूध एवं खोया की बहुत मांग है। मैं रोज 30 लीटर दूध सप्लाई करता हूँ। जिससे मुझे खर्च काटकर 16,000 रु. प्रतिमाह बचत होती है। बचत की रकम के साथ मैंने जो बैंक से कर्ज लिया था, वह तिमाही के रूप में बैंक को वापस कर दिया। शेष रकम से मैंने 12 मुर्रा भैंसें और खरीद लीं। इससे मेरी आमदनी में लगातार वृद्धि हुई जिससे मेरी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी हालत में संभव हो सकी। योजना का लाभ दिलाने में विभाग का सराहनीय सहयोग मुझे प्राप्त हुआ। पशुपालन विभाग सागर की डेयरी योजना का लाभ प्राप्त कर अपने अनुभव से दूसरे किसान भाइयों को योजना के बारे में बताया। जिससे सरकारी योजना का लाभ लेकर आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ-साथ दूध की भी पूर्ति हो सकें एवं कृषि एवं पशुपालन की पूरकता का लाभ किसान भाइयों को मिल सकें।
CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Jansampark Madhya Pradesh #JansamparkMP #sagar