चौरचन (चौठ चन्द्र) मिथिलांचल का एक अत्यंत पवित्र और अनूठा लोक-पर्व है, जिसे भाद्रपद (भादों) शुक्ल चतुर्थी को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि को चंद्रमा का दर्शन करने से झूठा कलंक लगने का भय रहता है, जिससे मुक्ति और आरोग्य की कामना के लिए शाम को चंद्र देव की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन घर के आंगन में खूबसूरत अरिपन (रंगोली) सजाई जाती है और दिनभर उपवास रख कर महिलाएं शाम में मिट्टी के बर्तनों में बनी स्वादिष्ट खीर, पुरी, ठेकुआ और मौसमी फलों को हाथों में लेकर उगते हुए चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। मिथिला की यह अनूठी परंपरा परिवार में सुख, समृद्धि और मान-सम्मान लेकर आती है।
Bihar, India | Sep 14, 2026