
40 साल से हरिद्वार के जायके की पहचान बने राज छोले-कुलचे, स्वाद ऐसा कि लोग खिंचे चले आते हैं
नगर कोतवाली के पास पोस्ट ऑफिस पर स्थित दुकान की खास पहचान, दो दशक तक सिर्फ छोले बेचकर बनाई अपनी अलग जगह
वासुदेव राजपूत, हरिद्वार स्तम्भ, हरिद्वार।
धर्मनगरी हरिद्वार की पहचान केवल गंगा घाटों, मंदिरों और धार्मिक स्थलों से ही नहीं, बल्कि यहां के पुराने जायकों से भी है। शहर की गलियों में कुछ ऐसी दुकानें हैं, जिन्होंने वर्षों की मेहनत और अपने स्वाद के दम पर लोगों के दिलों में खास जगह बनाई है। इन्हीं में एक नाम है ‘हरिद्वार के प्रसिद्ध शुद्ध एवं स्वादिष्ट राज छोले कुलचे’, जहां पिछले करीब 40 वर्षों से राज बहादुर अपने स्वाद के जरिए लोगों का भरोसा जीत रहे हैं।
हरिद्वार नगर कोतवाली के पास पोस्ट ऑफिस पर स्थित राज छोले-कुलचे की दुकान आज स्थानीय लोगों के बीच अपनी अलग पहचान रखती है। चार दशक का यह सफर केवल एक दुकान की कहानी नहीं, बल्कि मेहनत, लगन और बदलते वक्त के साथ अपने काम को आगे बढ़ाने की मिसाल भी है।
20 साल तक सिर्फ छोले बेचकर बनाई पहचान
राज बहादुर की दुकान की कहानी अपने आप में दिलचस्प है। आज जिस दुकान का नाम छोले-कुलचे के लिए जाना जाता है, वहां शुरुआती करीब 20 वर्षों तक केवल छोले ही बेचे जाते थे। उस दौर में कुलचे आसानी से उपलब्ध नहीं होते थे, इसलिए राज बहादुर ने छोले बेचकर ही अपने काम को आगे बढ़ाया।
समय बदला, खानपान की पसंद बदली और बाजार में कुलचों की उपलब्धता बढ़ी। इसके बाद दुकान पर छोले के साथ कुलचे भी मिलने लगे। धीरे-धीरे यह संयोजन दुकान की पहचान बन गया और राज छोले-कुलचे का नाम लोगों की जुबान पर चढ़ने लगा।
स्वाद और भरोसे के साथ 40 साल का सफर
किसी भी दुकान को चार दशक तक लोगों के बीच लोकप्रिय बनाए रखना आसान नहीं होता। इसके लिए लगातार मेहनत, ग्राहकों की पसंद का ध्यान और स्वाद में भरोसा बनाए रखना जरूरी है। राज बहादुर ने वर्षों तक अपने काम को जारी रखते हुए इसी सफर को आगे बढ़ाया है।
हरिद्वार आने वाले लोगों के लिए यहां के पुराने खानपान स्थलों का अपना आकर्षण है। वहीं, स्थानीय लोगों के लिए ऐसी दुकानें शहर की पुरानी यादों और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाती हैं। राज छोले-कुलचे भी इसी परंपरा का हिस्सा है, जहां स्वाद के साथ वर्षों पुराना जुड़ाव देखने को मिलता है।
छोटी दुकान, बड़ी पहचान
नगर कोतवाली के पास पोस्ट ऑफिस पर स्थित यह दुकान बताती है कि पहचान बनाने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। कई बार वर्षों की मेहनत, अपने काम के प्रति समर्पण और ग्राहकों का विश्वास ही किसी दुकान को खास बना देता है।
राज बहादुर के 40 वर्षों के इस सफर में सबसे खास बात यही है कि उन्होंने समय के साथ अपने काम को आगे बढ़ाया। दो दशक तक केवल छोले बेचने से शुरू हुआ सफर आज राज छोले-कुलचे के नाम से पहचाना जाता है।
हरिद्वार के पुराने स्वाद और खानपान की विरासत को जानना हो, तो राज बहादुर की यह कहानी भी शहर की उन दिलचस्प कहानियों में शामिल है, जो बताती हैं कि मेहनत और निरंतरता से एक छोटी-सी दुकान भी लोगों के दिलों में बड़ी जगह बना सकती है।
Haridwar Stambh Vasudev #foodlovers