
रेवाड़ी की पैरा एथलीट शर्मिला ने कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता गोल्ड, सीएम ने दी बधाई
बचपन से पोलियो व विवाह के बाद पति की प्रताड़नाओं को मात दे रचा इतिहास
रेवाड़ी समाचार पंकज कुमार।
रेवाड़ी की होनहार पैरा एथलीट शर्मिला ने कॉमनवेल्थ गेम्स में महिला शॉटपुट की एफ-57 श्रेणी में 9.81 मीटर थ्रो के साथ भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता। बचपन में पोलियो और विवाह के बाद घरेलू हिंसा लड़कर इस मुकाम को पाने वाली शर्मिला को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी बधाई दी है।
रेवाड़ी की शर्मिला को महज दो साल की उम्र में पोलियो हो गया था। विवाह के बाद पति की प्रताड़ना व घरेलू हिंसा का उसने डटकर सामना किया। उसने कभी हार नहीं मानी और दिव्यांग होते हुए आगे बढ़ने का संकल्प लिया। जिस उम्र की दहलीज पर आकर लोग खुद को थका हुआ महसूस करते हैं, वहीं 39 वर्षीय शर्मिला ने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है।
दो बेटियों की मां शर्मिला मूलरूप से महेन्द्रगढ़ के गांव छिछरौली की रहने वाली है और उसका 20 वर्ष पूर्व रेवाड़ी में विवाह हुआ था। पति की प्रताड़नाओं के चलते वह उससे अलग हो गई और दूसरा विवाह किया। इन हालातों में भी उसने संघर्ष की राह नहीं छोड़ी। बहुत ही गरीब परिवार से संबंध रखने वाली शर्मिला के पति एक छोटी से किरयाणा की दुकान चलाते हैं। वह हरियाणा रोडवेज के रेवाड़ी डिपो में अस्थाई तौर पर पहली महिला कंडक्टर लगी थी।
दिव्यांग शर्मिला ने कोरोनाकाल में खेल जगत में प्रवेश किया। वह नगर के राव तुलाराम स्टेडियम में जब पहुंची तो वहां पैरा खिलाड़ी बावल के टेकचन्द को व्हील चेयर पर खेलते हुए देखकर उसने भी कुछ कर गुजरने का निर्णय लिया। यहीं से उसके खेल कैरियर की शुरूआत हुई और टेकचन्द को ही अपना गुरु बना लिया। टेकचन्द ने उन्हें परीक्षण दिया और एक वर्ष में ही शर्मिला ने 2021 में राष्ट्रीय चेम्पियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। वर्ष 2022 में वह कॉमनवेल्थ गेम्स में शामिल तो हुई, लेकिन पदक जीतने से वंचित रह गई। चार साल बाद शर्मिला ने अब उसी मंच पर गोल्ड मेडल जीतकर साबित कर दिया कि चुनौतियां कितनी भी बड़ी क्यों न हो, संघर्ष से जीत संभव है। गोल्ड मेडल जीतने वाली शर्मिला के मायके व ससुराल में खुशी का माहौल है।
Rewari, Rewari | Jul 28, 2026