
यमुनानगर के सुनीश बिंदलिश बने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश
यमुनानगर से निकलकर कानून के क्षेत्र में बनाई पहचान, अब न्यायपालिका में मिली बड़ी जिम्मेदारी*
यमुनानगर, 25 अगस्त-जिलावासियों के लिए गर्व और हर्ष का विषय है कि यमुनानगर से गहरे पारिवारिक संबंध रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता सुनीश बिंदलिश को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। केंद्र सरकार ने 20 अगस्त को उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी की।
सुनीश बिंदलिश का परिवार मूल रूप से यमुनानगर से जुड़ा रहा है और शहर के सामाजिक एवं व्यावसायिक जीवन में बिंदलिश परिवार की एक पुरानी पहचान रही है। उनके दादा स्वर्गीय श्री मदन गोपाल गुप्ता कैथल से यमुनानगर आए थे और वर्ष 1960 के दशक में यहां कोका-कोला के व्यवसाय से जुड़े। इसके साथ ही उन्होंने साबुन निर्माण, पशु आहार तथा प्लाईवुड जैसे विभिन्न व्यवसायों में अपनी पहचान बनाई। यही परिवार आगे चलकर शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय हुआ और यमुनानगर में अद्वितीय स्कूल की स्थापना के माध्यम से आधुनिक, प्रगतिशील और वैकल्पिक शिक्षा की दिशा में कदम बढ़ाया।
सुनीश बिंदलिश के पिता वरिष्ठ अधिवक्ता रविंदर बिंदलिश ने 1970 के दशक में चंडीगढ़ को अपनी कर्मभूमि बनाया। आयकर कानून के क्षेत्र में उन्होंने विशेष पहचान बनाई और चंडीगढ़ के प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं में उनका नाम लिया जाता था। उन्होंने अपनी कानूनी यात्रा में अपीलीय स्तर तक महत्वपूर्ण मुकदमों की पैरवी की। पिता से मिली कानूनी विरासत को सुनीश बिंदलिश ने आगे बढ़ाया। उन्होंने *सिम्बायोसिस विश्वविद्यालय पुणे से कानून की शिक्षा प्राप्त की और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में लंबे समय तक अपनी प्रभावशाली वकालत के लिए जाने गए। वे जीएसटी के वरिष्ठ स्टैंडिंग काउंसिल रहे हैं और हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में भी कार्य किया। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में भी वे लंबे समय से विभिन्न संवैधानिक, कराधान और अन्य महत्वपूर्ण मामलों में अधिवक्ता के रूप में दर्ज रहे हैं।
हालांकि सुनीश बिंदलिश ने अपनी पेशेवर जिंदगी चंडीगढ़ में बनाई, लेकिन यमुनानगर से उनका भावनात्मक रिश्ता आज भी उतना ही गहरा है। बचपन की अनेक स्मृतियां इस शहर से जुड़ी हैं और वे अक्सर यमुनानगर को अपने दिल के सबसे करीब बताते हैं। यमुनानगर की गलियों, परिवार और बचपन की यादों से लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की न्यायिक बेंच तक का यह सफर शहर के लिए भी गर्व की कहानी है। एक ऐसे परिवार की तीसरी पीढ़ी, जिसकी जड़ें यमुनानगर में हैं, अब न्याय के मंदिर में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने जा रही है।