
कृषि में नवाचार: ड्रैगन फ्रूट की खेती से बदली खेती की तस्वीर
प्रगतिशील किसान डॉ. सियाराम मीना ने प्रस्तुत किया लाभकारी खेती का मॉडल।
सवाई माधोपुर। राजस्थान ।
जिले के किसान पारंपरिक खेती के साथ नवाचार अपनाकर कृषि क्षेत्र में नई पहचान बना रहे हैं। वजीरपुर तहसील के मोहचा गांव निवासी प्रगतिशील किसान डॉ. सियाराम मीना ने पारंपरिक फसलों से अलग ड्रैगन फ्रूट (कमलम) की खेती शुरू कर आधुनिक खेती का मॉडल प्रस्तुत किया है।
डॉ. सियाराम मीना ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट की खेती में पानी की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम रहती है और बाजार में इसकी मांग एवं कीमत अच्छी मिल सकती है। खेती शुरू करने से पहले उन्होंने फसल की तकनीकी जानकारी हासिल की। सहायक कृषि अधिकारी पिन्टू मीना पहाड़ी ने पौधरोपण, पोल एवं सपोर्ट सिस्टम, सिंचाई, खाद-पोषण, पौधों की ट्रेनिंग, फूल-फल प्रबंधन तथा रोग-कीट नियंत्रण को लेकर तकनीकी मार्गदर्शन दिया।
ड्रिप सिंचाई और जैविक खाद उपयोगी
संयुक्त निदेशक कृषि लखपत लाल मीना ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट की खेती में ड्रिप सिंचाई उपयोगी रहती है। खेत में पानी का ठहराव नहीं होना चाहिए। रोपण के समय अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद एवं जैविक पदार्थ तथा समय-समय पर वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग पौधों की वृद्धि के लिए लाभकारी रहता है। संतुलित पोषण और वैज्ञानिक देखभाल से उत्पादन को बेहतर किया जा सकता है।
सहायक निदेशक कृषि राधारमण शर्मा ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट गर्म जलवायु में अच्छी तरह विकसित होता है, लेकिन अत्यधिक गर्मी और तेज धूप के दौरान पौधों को सनबर्न से बचाना आवश्यक है। साथ ही खेत में उचित जल निकास की व्यवस्था जरूरी है, क्योंकि जड़ों के आसपास पानी जमा रहने से सड़न और अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
12-18 महीने में शुरू हो सकता है फलन
सहायक कृषि अधिकारी पिन्टू मीना पहाड़ी के अनुसार अच्छी गुणवत्ता की रोपण सामग्री और वैज्ञानिक प्रबंधन से ड्रैगन फ्रूट के पौधों में लगभग 12 से 18 महीने बाद फूल एवं फल आना शुरू हो सकते हैं। हालांकि मौसम, किस्म और प्रबंधन के अनुसार फलन की अवधि में अंतर हो सकता है। फल पूर्ण विकसित होकर गुलाबी या लाल रंग प्राप्त करने पर उनकी तुड़ाई की जाती है।
उन्होंने किसानों को केवल उत्पादन बढ़ाने के बजाय ग्रेडिंग, पैकिंग, स्थानीय बाजार, थोक खरीदार, होटल-रेस्टोरेंट और सीधे उपभोक्ताओं तक बिक्री की व्यवस्था पर भी ध्यान देने की सलाह दी।
कृषि अधिकारियों ने किया खेत का भ्रमण
भरतपुर के अतिरिक्त निदेशक कृषि विस्तार देशराज सिंह ने मोहचा गांव पहुंचकर डॉ. सियाराम मीना के ड्रैगन फ्रूट खेत का भ्रमण किया और फसल का अवलोकन किया। उन्होंने बताया कि ड्रैगन फ्रूट उच्च मूल्य वाली फल फसल है, जिसे सीमित पानी वाले क्षेत्रों में भी वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ उगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि खेती में नवाचार के साथ तकनीकी मार्गदर्शन का उपयोग किसानों को बेहतर परिणाम प्राप्त करने में मदद कर सकता है। डॉ. सियाराम मीना का ड्रैगन फ्रूट खेत कृषि में नए प्रयोग का उदाहरण है।
Balghat, Karauli | Sep 26, 2026