
भगवान शिव संग माता पार्वती के विवाह की ख़ुशी में जमकर झूमे श्रद्धालु
-अखंड गीता पीठ शाश्वत सेवाश्रम में आयोजित शिव महापुराण कथा के दौरान सुनाया दिव्य विवाह प्रसंग
कुरुक्षेत्र, 21 अगस्त : सैक्टर-8 स्थित अखंड गीता पीठ शाश्वत सेवाश्रम में आयोजित एकादश अतिरूद्र महायज्ञ के अन्तर्गत आयोजित शिव महापुराण कथा के दौरान कथा-व्यास महामंडलेश्वर स्वामी शाश्वतानंद गिरि महाराज ने भगवान शिव संग माता पार्वती के दिव्य विवाह का प्रसंग सुनाया। कथा के मंच पर शिव विवाह प्रसंग को दर्शाती भव्य झांकीयां दिखाई गई। इससे पहले प्रातःकाल यजमानों ने 251 शिवलिंगों का रुद्राभिषेक किया। कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी शाश्वतानंद गिरि महाराज ने शिव विवाह प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हिन्दू पौराणिक कथाओं में अत्यंत महत्वपूर्ण प्रसंग है। सती के वियोग के बाद भगवान शिव गहन तपस्या में लीन हो गए थे। माता सती ने पर्वतराज हिमालय के यहाँ पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया और शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर शिवजी ने उनसे विवाह करना स्वीकार किया। भगवान शिव की बारात में भूत, प्रेत, पिशाच, अघोरी, जीव-जंतु और शिवगण शामिल हुए। शिवजी स्वयं अंगों पर भस्म लपेटे, गले में सर्पों की माला पहने और अष्टमूर्तिक रूप में नंदी पर सवार होकर विवाह के लिए निकले। शिवजी के इस भयंकर और अद्भुत स्वरूप को देखकर पार्वती जी की माता मैना भयभीत हो गईं और मूर्छित होकर गिर पड़ीं।माता पार्वती के अनुरोध पर भगवान शिव ने अपना भयंकर रूप बदला और एक अत्यंत मनमोहक एवं दिव्य 'सुंदरमूर्ति' रूप धारण किया।हिमालय के प्रांगण में देवताओं, ऋषियों और ब्रह्मदेव की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शिव-पार्वती का विवाह संपन्न हुआ। यह प्रसंग शिव (चेतना) और शक्ति (ऊर्जा) के शाश्वत मिलन और ब्रह्मांडीय संतुलन का प्रतीक माना जाता है।