
◉ साइबर क्राइम ब्रांच (R4C) की जनहित में जारी एडवाइजरी: चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज मटेरियल (CSAM) का ऑनलाइन प्रसार गंभीर व गैर-जमानती अपराध
◉ इंटरनेट पर बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री खोजना, देखना या शेयर करना पॉक्सो व आईटी एक्ट के तहत दंडनीय; साइबर पुलिस ने जारी किए दिशा-निर्देश
महानिदेशक पुलिस राजस्थान श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच (R4C) द्वारा राज्य में साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने और आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण जनहित एडवाइजरी जारी की गई है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री वीके सिंह ने बताया कि चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज मटेरियल (CSAM) यानी बच्चों के यौन शोषण व दुर्व्यवहार से संबंधित किसी भी सामग्री को ऑनलाइन खोजना, देखना, बनाना, डाउनलोड करना या शेयर करना कानूनन गंभीर और दंडनीय अपराध है।
एडीजी श्री सिंह ने बताया कि यह कोई सामान्य एडल्ट कंटेंट नहीं है, बल्कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों का डिजिटल दस्तावेज है, जिसमें बच्चे की सहमति कानूनन मान्य नहीं होती। ऐसी सामग्री का इंटरनेट पर प्रसार बच्चे के मौलिक अधिकारों, निजता और गरिमा का सीधा उल्लंघन है।
◆ डिलीट करने के बाद भी दर्ज रहता है डिजिटल रिकॉर्ड; न बनें अपराध के चक्र का हिस्सा
श्री सिंह ने बताया कि जब कोई व्यक्ति इंटरनेट पर CSAM सामग्री को देखता, सर्च करता या डाउनलोड करता है, तो इससे ऐसी अवैध सामग्री की मांग बढ़ती है और अपराधियों को बच्चों के शोषण का और अधिक अवसर मिलता है। इसलिए ऐसी सामग्री को देखना या शेयर करना सीधे तौर पर 'चैन ऑफ क्राइम' (अपराध के चक्र) का हिस्सा बनना है।
पुलिस ने सचेत किया है कि इंटरनेट पर CSAM सामग्री सर्च करने या किसी सोशल मीडिया ग्रुप में प्राप्त करने पर उसका पक्का डिजिटल रिकॉर्ड दर्ज हो जाता है, जो फाइल डिलीट करने के बाद भी फॉरेंसिक रिकॉर्ड में सुरक्षित रहता है। अनजाने में या अनचाहे ऐसी सामग्री प्राप्त होने पर उसे आगे बढ़ाने के बजाय तुरंत साइबर पोर्टल पर रिपोर्ट करने की अपील की गई है।
@policerajasthan
#BalotraPolice #CyberSafety #StopCSAM #ChildSafety #CyberAwareness