
"मीडिया बिकाऊ है"... तो खरीदार कौन है?
आजकल बिना सोचे-समझे यह कहना बहुत आसान हो गया है कि "मीडिया बिकाऊ है।" लेकिन सवाल यह है कि अगर मीडिया बिकाऊ है, तो उसे खरीदने वाला कौन है? क्या आज तक किसी ने सामने आकर कहा कि "हाँ, मैंने इतने रुपये देकर खबर छपवाई या हटवाई है?" अगर नहीं, तो बिना सबूत पूरे मीडिया को बदनाम करना कहाँ तक सही है?
चुनाव आते ही नेताओं और उनके कार्यकर्ताओं को मीडिया भगवान जैसा लगता है। हर कार्यक्रम में मीडिया को बुलाया जाता है, कवरेज की उम्मीद की जाती है। लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म होते हैं और मीडिया उनकी कमियों पर सवाल उठाता है, तो कहा जाता है—"इसे हमने कुछ दिया नहीं, इसलिए हमारे खिलाफ खबर चला रहा है।" दूसरी ओर, अगर मीडिया सरकार के किसी अच्छे काम की प्रशंसा कर दे, तो विपक्ष कहता है—"इसे खरीद लिया गया है।" आखिर हर खबर को खरीद-फरोख्त से जोड़ना कब बंद होगा?
कुछ लोग कहते हैं कि "मीडिया वाले तो दिनभर विज्ञापन दिखाते हैं।" लेकिन ज़रा सोचिए, अगर विज्ञापन नहीं होंगे तो मीडिया संस्थान और पत्रकार अपना घर कैसे चलाएंगे? क्या आपने कभी किसी ईमानदार पत्रकार या मीडिया संस्थान का सहयोग किया?
बड़े-बड़े अभिनेता करोड़ों रुपये लेकर गुटखा, जर्दा और नशे से जुड़े उत्पादों का प्रचार करते हैं। क्या उनका विरोध भी उतनी ही ताकत से किया जाता है, जितना मीडिया का किया जाता है?
हाँ, यह भी सच है कि कुछ लोग पत्रकारिता की आड़ में ब्लैकमेलिंग करते हैं। ऐसे लोगों का विरोध होना चाहिए। लेकिन अगर आपको किसी पत्रकार से शिकायत है, तो हिम्मत के साथ उसका नाम लेकर विरोध कीजिए, सबूत के साथ सवाल उठाइए। कुछ लोगों की गलतियों की सज़ा पूरे मीडिया समाज को क्यों दी जाए?
अगर किसी परिवार का एक सदस्य गलत रास्ते पर चला जाए, तो क्या पूरा परिवार गलत हो जाता है? नहीं। फिर कुछ लोगों की वजह से पूरी पत्रकारिता को "बिकाऊ" और "ब्लैकमेलर" कहना कैसे सही हो सकता है?
पत्रकार का काम सिर्फ तारीफ़ करना नहीं, बल्कि अच्छे कामों की सराहना करना और गलत पर सवाल उठाना भी है। इसलिए जब कोई पत्रकार आपकी आवाज़ उठाए, आपकी समस्या प्रशासन तक पहुँचाए या समाजहित का मुद्दा उठाए, तो उसकी सराहना भी कीजिए।
व्यक्ति का विरोध कीजिए, पूरे मीडिया का नहीं। क्योंकि ईमानदार पत्रकारिता लोकतंत्र की ताकत है, और उसे कमजोर करना अंततः समाज को ही कमजोर करता है।
बुराई की चर्चा करें, लेकिन अच्छाई की प्रशंसा करना भी सीखें।