
**मऊगंज के मलकपुर में हाथी की मौत पर महा-संग्राम: पूर्व विधायक बन्ना का DFO पर करारा हमला, सत्ताधारी विधायकों की चुप्पी पर उठे तीखे सवाल; जानिए पल-पल की बड़ी अपडेट्स**
मऊगंज जिले के ग्राम पंचायत हर्राह अंतर्गत मलकपुर के कठौतिया टोला में करंट लगने से हुई एक नर हाथी की दर्दनाक मौत के बाद पूरे प्रदेश का सियासी और प्रशासनिक माहौल गरमा गया है। पिछले 8 महीनों से मऊगंज, रीवा और सीधी जिले के जंगलों में बेखौफ विचरण कर रहे हाथियों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग और बिजली मंडल के बड़े-बड़े दावों की पोल इस एक हादसे ने खोलकर रख दी है। बेजुबान की अकाल मौत के बाद अब प्रशासनिक नाकामी और राजनीतिक खामोशी को लेकर जनता में जबरदस्त उबाल देखने को मिल रहा है। हादसे की खबर मिलते ही मऊगंज के पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना बिना किसी देरी के मलकपुर घटनास्थल पर पहुंचे और पूरे स्थिति का जायजा लिया। मौके पर प्रशासनिक अव्यवस्था देखकर उनका गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने घटनास्थल पर मौजूद वन मंडल अधिकारी (DFO) को जमकर आड़े हाथों लिया। बन्ना के तीखे और तार्किक सवालों के आगे DFO असहाय नजर आए। सुखेंद्र सिंह बन्ना ने दोटूक शब्दों में कहा कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि सीधे तौर पर वन विभाग और विद्युत मंडल की आपराधिक लापरवाही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराने के बजाय DFO समेत उनसे भी उच्च पदस्थ जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित और बर्खास्त किया जाना चाहिए। मऊगंज की जनता का भी मानना है कि संकट के समय धरातल पर उतरकर बेजुबानों और आम जनता की लड़ाई लड़ने वाले नेताओं की ही मऊगंज को सख्त जरूरत है, और पूर्व विधायक बन्ना ने मौके पर पहुंचकर जनप्रतिनिधि होने का वास्तविक फर्ज निभाया है। इस भीषण हादसे और प्रशासनिक विफलता के बावजूद सत्ता के गलियारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। मऊगंज के वर्तमान विधायक प्रदीप पटेल और देवतलाब विधायक व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम की ओर से अब तक न तो घटनास्थल का दौरा किया गया और न ही इस मामले में कोई स्पष्टीकरण या बयान जारी किया गया है। क्षेत्रीय जनता अब सवाल उठा रही है कि आखिर इतने बड़े हादसे के बाद भी सत्ताधारी जनप्रतिनिधि खामोश क्यों हैं? क्या मऊगंज की जनता और वन्यजीवों की सुरक्षा उनके एजेंडे में शामिल नहीं है? यह चुप्पी यह दर्शाने के लिए काफी है कि सत्ता में बैठे नेता धरातल की समस्याओं से कितने कटे हुए हैं। घटना के बाद मऊगंज और रीवा दोनों रेंजों का प्रभार संभाल रहीं वन अधिकारी वर्षा सिंह की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर आरोप लग रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि प्रभावशाली राजनीतिक परिवार और मंत्री घराने से ताल्लुक रखने के कारण वर्षा सिंह रीवा में रहकर ही मऊगंज की रेंज का संचालन कर रही हैं। जब महीनों से हाथियों का मूवमेंट मऊगंज, रीवा और उत्तर प्रदेश से लगे सीमावर्ती इलाकों में दर्ज था, तो आबादी के नजदीक गुजर रही विद्युत लाइनों को लेकर पुख्ता सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए? मऊगंज की जनता का कहना है कि अब लीपापोती से काम नहीं चलेगा, मऊगंज के प्रशासनिक अमले की पूरी ओवरहॉलिंग (पूरी पलटी) होनी चाहिए और लापरवाह अफसरों पर तत्काल बर्खास्तगी की कार्रवाई की जानी चाहिए। इस पूरे मामले पर 'इंडिया हेडलाइन 24' के मुख्य संपादक दीपक कुमार गुप्ता ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि जब तक हाथी की मौत के जिम्मेदार बड़े अधिकारियों पर गाज नहीं गिरती और बिजली-वन विभाग के बीच पुख्ता तालमेल की व्यवस्था नहीं बनती, तब तक इंडिया हेडलाइन 24 इस मुद्दे को लगातार उठाता रहेगा और सत्ता व प्रशासन से तीखे सवाल पूछता रहेगा। घटनास्थल से आ रही ताजा और बड़ी अपडेट के मुताबिक, मृत हाथी के साथी (दूसरे हाथी) की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। बांधवगढ़ से बुलाई गई विशेषज्ञ वन्यजीव टीम और क्षेत्रीय अमले की मौजूदगी में दूसरे हाथी की गतिविधियों को नियंत्रित करने और उसे सुरक्षित रेस्क्यू करने के लिए ट्रेंकुलाइज़र/आवश्यक सुरक्षात्मक इंजेक्शन लगाया गया है, ताकि उसे आबादी वाले इलाकों और बिजली की एचटी लाइनों से दूर सुरक्षित जंगल की ओर भेजा जा सके। मलकपुर के कठौतिया टोला में हाथी रात के समय एक मकान के पास लगे पेड़ से पत्तियां खाने पहुंचा था, तभी वह झोपड़ी व घर की ओर गई विद्युत लाइन के संपर्क में आ गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत की वजह करंट लगने को ही बताया गया है। जब वन विभाग के पास एक हाथी के रेडियो कॉलर की लोकेशन उपलब्ध थी और विभागीय टीम मॉनिटरिंग का दावा कर रही थी, तब उस विशिष्ट समय पर मलकपुर क्षेत्र की बिजली सप्लाई तुरंत बंद क्यों नहीं कराई गई? यह लापरवाही सीधे तौर पर वन विभाग और बिजली विभाग के बीच समन्वय की कमी को दर्शाती है। अब देखना यह होगा कि सोई हुई सरकार और मौन साधे बैठे स्थानीय विधायक इस प्रशासनिक नाकामी पर क्या रुख अपनाते हैं या फिर जांच के नाम पर मामले को फाइलों में दबा दिया जाता है।
*विशेष समाचार रिपोर्ट: संपादक दीपक कुमार गुप्ता (मो. 7566164891)*
*(इंडिया हेडलाइन 24 - मऊगंज/सीतापुर ग्राउंड कवरेज)*
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Mauganj, Rewa | Sep 21, 2026