
नसों में दौड़ती मौत | SA News Chhattisgarh
22-06-2026: कल्पना कीजिए उस दर्द की, जब शरीर की नसों में दौड़ता खून ही जीवन देने के बजाय जानलेवा चुभन बन जाए। आज 19 'विश्व सिकल सेल दिवस' (World Sickle Cell Day) है। यह सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि उस खामोश महामारी के प्रति जागने का अलार्म है जो पीढ़ियों को अंदर ही अंदर खोखला कर रही है। विशेषकर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण व आदिवासी अंचलों में यह बीमारी एक गंभीर संकट का रूप ले चुकी है, जहाँ हर साल कई मासूम जन्म से ही इस भयानक दर्द के वारिस बन जाते हैं।
विज्ञान आने वाली पीढ़ी को तो बचा सकता है, लेकिन जो आज इस दर्द से तड़प रहे हैं, उनका क्या? मेडिकल साइंस के पास दर्द निवारक दवाएं तो हैं, लेकिन कोई सर्वसुलभ और स्थायी इलाज नहीं। यहीं पर जीवन का वह गूढ़ रहस्य सामने आता है जिसे आधुनिकता की दौड़ में हम भूल गए हैं 'हमारे पूर्व जन्मों के कर्म'। जब तक कर्मों का यह हिसाब चुकता नहीं होता, इंसान बीमारियों की भट्ठी में जलता रहता है।
संत रामपाल जी महाराज बताते हैं कि पूर्ण परमात्मा की 'सतभक्ति' में वह शक्ति है जो इन पाप कर्मों को जड़ से काट सकती है। ऋग्वेद (मंडल 10 सूक्त 161 मंत्र 2) भी इस बात की गवाही देता है कि पूर्ण परमात्मा रोगी की अकाल मृत्यु को टालकर उसे स्वस्थ जीवन प्रदान कर सकते हैं। आज संत जी के तत्वज्ञान को समझकर लाखों लोग नाम दीक्षा ले रहे हैं और असाध्य रोगों से मुक्त होकर स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।
आइए, इस सिकल सेल दिवस पर केवल मेडिकल जांच (विवाह पूर्व ब्लड टेस्ट) तक सीमित न रहें, बल्कि तत्वज्ञान को समझकर सतभक्ति अपनाएं और अपने परिवार को कर्मों के इस जानलेवा चक्र से हमेशा के लिए सुरक्षित करें।
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