
सीमा पर इंतज़ार करता एक अधूरा सपना: अपने ही देश में अपनी जमीन के हक से वंचित पाक विस्थापित
बाड़मेर जिले के सीमावर्ती क्षेत्र गोहड़ का तला की यह तस्वीर केवल एक बुजुर्ग दंपति की नहीं, बल्कि उन सैकड़ों पाक विस्थापित परिवारों की कहानी बयां करती है जो वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
तस्वीर में दिखाई दे रहे बुजुर्ग सता राम गढ़वीर, पिता सारंग राम गढ़वीर, अपनी पत्नी के साथ आज भी उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब उन्हें उनकी जमीन पर कानूनी अधिकार मिलेगा। वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान वे पाकिस्तान से भारत आए थे। उन्होंने भारत को अपना देश माना, यहीं जीवन बिताया, लेकिन दशकों बाद भी वे कई सरकारी सुविधाओं और अपनी जमीन के अधिकार से वंचित हैं।
उनकी आर्थिक स्थिति तस्वीर में साफ झलकती है। कच्चा घर, सीमित संसाधन और बुढ़ापे का सहारा केवल एक-दूसरे का साथ। सबसे पीड़ादायक बात यह है कि उनकी कोई संतान भी नहीं है, फिर भी वे आज तक अपने हक की जमीन के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
बताया जाता है कि ऐसे कई विस्थापित परिवार सरकार को अपनी जमीन से जुड़े निर्धारित शुल्क और अन्य औपचारिकताएं पूरी क
Barmer, Barmer | Jul 12, 2026