
#हनुमानगढ़
ईंतकाल की फाइल का 'सेवा शुल्क' लेते ही पटवारी पहुंचा एसीबी की शरण में
हनुमानगढ़। कहते हैं कि सरकारी काम में धैर्य रखना पड़ता है, लेकिन कुछ अधिकारी धैर्य के साथ "दक्षिणा" भी पसंद करते हैं। हनुमानगढ़ के चाहूवाली पटवार मंडल में तैनात पटवारी श्रीराम ने भी शायद यही सोचकर ईंतकाल दर्ज करने की कीमत 30 हजार रुपये तय कर दी।
परिवादी से आधी रकम यानी 15 हजार रुपये लेते समय पटवारी साहब को लगा होगा कि आज का दिन कमाई के लिहाज से शुभ है। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जैसे ही नोट हाथ में आए, एसीबी की टीम भी दर्शन देने पहुंच गई।
सूत्रों के अनुसार पटवारी साहब ईंतकाल दर्ज करने से पहले "नकद नारायण" के दर्शन करना चाहते थे। मगर इस बार नोटों के साथ एसीबी का आशीर्वाद भी मिल गया। परिणामस्वरूप फाइल आगे बढ़ने से पहले पटवारी साहब खुद एसीबी की गाड़ी में आगे बढ़ गए।
इलाके में चर्चा है कि अब पटवारी जी को कुछ समय तक जमीनों के रिकॉर्ड नहीं, बल्कि अपने बयान और केस की फाइलें देखनी पड़ेंगी। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि अगर सरकारी काम की फीस सरकार ने तय कर रखी है, तो फिर कुछ लोगों को अलग से 'प्रीमियम पैकेज' बेचने की जरूरत क्यों पड़ जाती है?
फिलहाल एसीबी जांच में जुटी है और पटवारी साहब यह सोच रहे होंगे कि 15 हजार रुपये की यह कमाई आखिर कितनी महंगी पड़ गई।
#hanumangarhcity #ACBAction #रिश्वत #भ्रष्टाचार