कल एक राजा अपने बेटे को बगल में बैठाकर मुझसे ‘रावण’ कहलवा रहे थे, जबकि मैं अपने बेटे से सभी को शुभकामनाएँ दिलवा रहा था।
मुझे राजा से तो ऐसी उम्मीद थी, लेकिन रानी साहिबा भी अपने बच्चे को ऐसे संस्कार देंगी, इसकी उम्मीद नहीं थी।
बच्चों को अच्छे संस्कार जरूर दीजिए। अगर विपक्ष में चुनाव लड़ना ही ‘रावण’ की उपाधि पाने का आधार है, तो समझ लीजिए कि राजनीति में सब रावण ही हैं। फिर तो आपके पिता भी, आपके दादा भी और भविष्य में शायद आप भी इसी उपाधि के हकदार हो सकते हैं।
भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र की सम्मानित जनता से मेरा आग्रह है कि ऐसे बड़बोले और बिगड़ैल बेटों को लगाम लगाने का काम करें।
कहावत है— “रस्सी जल गई, लेकिन ऐंठन नहीं गई।” कुछ ऐसा ही हाल इन तथाकथित राजाओं का है।
— भानु प्रताप शाही
पूर्व मंत्री, झारखंड
Bhanu Pratap Shahi
Kanke, Ranchi | Oct 21, 2026