
#प्रयागराज के झूंसी को शास्त्री पुल से जोड़ने वाली 2.2 किलोमीटर लंबी सड़कों पर एक बार फिर गड्ढे और डामर उखड़ने की घटनाएँ सामने आई हैं!
#जिससे राहगीरों व वाहन चालकों की जानमाल के लिए जोखिम बना हुआ है। करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई यह लेन जून में मरम्मत के बाद 15 जुलाई को यातायात के लिए खोली गई थी, लेकिन चार दिन के भीतर ही सड़क उखड़ने लगी थी।
#अब सितंबर में भी वही हालात दोहराए गए हैं और कई स्थानों पर डामर की परत उखड़कर लोहे की सरिया दिखाई देने लगी है।
#स्थानीय नागरिकों ने बताया कि पिलर नंबर 26, 45, 35, 15 और 8 के पास सड़क पर विशेष रूप से समस्याएं हैं। कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं और उखड़ी हुई डामर पर वाहन चलाना खतरनाक हो गया है। राहगीरों का कहना है कि रात के समय सड़क पर अंधेरा होने के कारण हादसे का खतरा और बढ़ जाता है।
#पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (पीडब्ल्यूडी) ने पहले मरम्मत के तुरंत बाद सड़क उखड़ने का कारण एक्सपेंशन ज्वाइंट पर दबाव बताया था। अधिकारियों ने कहा था कि ज्वाइंट में असामान्य दबाव के कारण डामर चिपकाव ढीला हुआ और परत उखड़ी। हालांकि अब फिर से गड्ढों के बनने और पिलरों में तकनीकी खामियों की बात सामने आने से निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
#सड़क उपयोग करने वाले व्यापारियों व स्थानीय निवासियों ने निर्माण कंपनी और पीडब्ल्यूडी से तत्काल मरम्मत की मांग की है। कई लोगों ने कहा कि इतनी छोटी अवधि में बार-बार मरम्मत कराना और वह भी स्थायी समाधान न होना, काम में इस्तेमाल सामग्री अथवा निर्माण प्रक्रिया में कमी का संकेत देता है।
#स्थानीय पार्षद व यातायात पुलिस ने कहा कि फिलहाल प्रभावित हिस्सों पर अस्थायी चेतावनी संकेत व रिस्ट्रीक्शन लगाए जा रहे हैं ताकि दुर्घटना की संभावना कम की जा सके। उन्होंने पीडब्ल्यूडी से अनुरोध किया है कि पुनरावलोकन कराकर दोषी पक्ष की जिम्मेदारी तय की जाए और स्थायी मरम्मत कराई जाए।
#पीडब्ल्यूडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर कहा कि तकनीकी जांच जारी है और आवश्यक होने पर तीसरी पार्टी से भी क्वालिटी ऑडिट कराया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि सड़क का स्थायी सुधार जल्द करवा दिया जाएगा, परन्तु तारीख नहीं दी गई।
#विशेषज्ञों का मानना है कि पुल से जुड़ी सड़क के मामलों में एक्सपेंशन ज्वाइंट, जल निकासी और बेस कंस्ट्रक्शन की गुणवत्ता निर्णायक होती है। यदि इन तीनों पहलुओं में कमी रहे तो छोटे समय में ही ढील और उखड़ना शुरू हो सकता है।
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि जब तक ठोस मरम्मत नहीं होती और
#जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से पुख्ता कदम नहीं उठाए जाते, तब तक इस मार्ग का उपयोग सीमित करें और दूसरी वैकल्पिक मार्गों का प्रयोग करें।