
बिना जांच होमगार्ड की प्रतिनियुक्ति निरस्त करने की अनुशंसा पर बवाल, कार्रवाई से टूटे जवान को आत्महत्या से रोका गया
झारखंड दृष्टि सबडिवीजन ब्यूरो चीफ सत्येंद्र कुमार केसरी की रिपोर्ट
गढ़वा जिला के भंडरिया प्रखंड के भंडरिया रेफरल अस्पताल में प्रतिनियुक्त होमगार्ड जवान फरजुन मिंज के विरुद्ध बिना विभागीय जांच किए प्रतिनियुक्ति निरस्त करने एवं भविष्य में स्वास्थ्य विभाग में प्रतिनियुक्त नहीं किए जाने की सिविल सर्जन गढ़वा की अनुशंसा को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. इस कार्रवाई के खिलाफ स्वास्थ्यकर्मियों, होमगार्ड जवानों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों में भारी नाराजगी है. उनका आरोप है कि बिना किसी निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्ष का बयान लिए एकतरफा कार्रवाई की गई, जिससे एक गरीब परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है.
जानकारी के अनुसार, असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, गढ़वा द्वारा जिला समादेष्टा, झारखंड गृह रक्षा वाहिनी को पत्र भेजकर फरजुन मिंज की प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त करने तथा भविष्य में स्वास्थ्य विभाग में उनकी प्रतिनियुक्ति नहीं करने की अनुशंसा की गई है. पत्र में महिला चिकित्सक के साथ अभद्र व्यवहार की शिकायत का उल्लेख किया गया है.
हालांकि अस्पताल के कई स्वास्थ्यकर्मियों का दावा है कि घटना के समय प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी स्वयं मौजूद थे और उनके सामने महिला चिकित्सक के साथ किसी प्रकार का अभद्र व्यवहार नहीं हुआ. स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि महिला चिकित्सक और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के बीच किसी बात को लेकर बहस हो रही थी. इसी दौरान स्थिति को शांत कराने के उद्देश्य से बीच-बचाव करने पहुंचे होमगार्ड जवान फरजुन मिंज को ही विवाद का जिम्मेदार बना दिया गया.
स्वास्थ्यकर्मियों का आरोप है कि यदि किसी कर्मचारी पर गंभीर आरोप लगाए गए थे तो सबसे पहले विभागीय जांच कराई जानी चाहिए थी, प्रत्यक्षदर्शियों का बयान लिया जाना चाहिए था और उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए था. लेकिन बिना जांच सीधे कार्रवाई की अनुशंसा कर देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है. इस फैसले से अस्पताल के अन्य स्वास्थ्यकर्मियों में भी भय और असंतोष का माहौल व्याप्त है.
मामले को लेकर भंडरिया पंचायत की पूर्व मुखिया सुशीला केरकेट्टा ने भी सिविल सर्जन से दूरभाष पर बात की.पूर्व मुखिया का कहना है कि उन्होंने निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया, लेकिन उनके अनुसार सिविल सर्जन ने कहा कि यह जांच का विषय नहीं है. हमें कानून पता है और कानून के तहत कार्रवाई की गई है। इस जवाब के बाद स्थानीय लोगों में और अधिक नाराजगी देखी जा रही है. उनका कहना है कि कानून सबके लिए समान है तो निष्पक्ष जांच भी होनी चाहिए थी.
इधर फरजुन मिंज ने भी इस कार्रवाई को लेकर गढ़वा स्थित अपने विभागीय कार्यालय में बिना जांच कार्रवाई किए जाने का आरोप लगाते हुए इसकी जानकारी दी है. बताया जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम से वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुके हैं. स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार, बुधवार को वे कथित रूप से आत्महत्या करने के उद्देश्य से निकल पड़े थे.इसकी भनक अस्पताल के कर्मचारियों को लगते ही उन्होंने तत्काल हस्तक्षेप कर उन्हें समझाया और आत्मघाती कदम उठाने से रोक लिया। इस घटना के बाद स्वास्थ्यकर्मियों में भी चिंता का माहौल है।
होमगार्ड जवानों और अस्पताल कर्मियों का कहना है कि एकतरफा कार्रवाई से फरजुन मिंज ही नहीं, बल्कि उनका पूरा परिवार गहरे संकट में आ गया है। उनका कहना है कि बिना जांच किसी कर्मचारी का भविष्य दांव पर लगा देना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराए जाने तथा जांच पूरी होने तक सिविल सर्जन की अनुशंसा पर रोक लगाने की मांग की है।
इस मामले ने अब भंडरिया में तूल पकड़ लिया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो वे आगे आंदोलन की रणनीति बना सकते हैं। फिलहाल सभी की निगाहें जिला प्रशासन और गृह रक्षा वाहिनी के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्णय पर टिकी हैं।
Garhwa, Garhwa | Jul 10, 2026