
46 की दवा 250 में! दून अस्पताल में जनऔषधि केंद्र को लेकर डॉक्टर-फार्मासिस्ट आमने-सामने......
देहरादून। दून अस्पताल में जनऔषधि केंद्र पर मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप है कि ऑर्थो विभाग में तैनात एक डॉक्टर ने जनऔषधि केंद्र की महिला फार्मासिस्ट को मरीजों को कैल्शियम और पोषण से संबंधित दवाएं केंद्र से नहीं देने की हिदायत दी। फार्मासिस्ट द्वारा इसका कारण पूछे जाने पर डॉक्टर की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिए जाने की बात सामने आई है। मामले की जानकारी अस्पताल प्रशासन तक पहुंचने के बाद जांच शुरू करने की बात कही गई है।
जानकारी के मुताबिक, ऑर्थो विभाग के संबंधित डॉक्टर और जनऔषधि केंद्र की महिला फार्मासिस्ट के बीच दवाओं को लेकर विवाद हुआ। आरोप है कि डॉक्टर ने फार्मासिस्ट से कहा कि मरीजों को कैल्शियम और पोषण से जुड़ी दवाएं जनऔषधि केंद्र से उपलब्ध न कराई जाएं। फार्मासिस्ट ने जब इस निर्देश का कारण पूछा तो डॉक्टर कथित तौर पर बिना स्पष्ट जवाब दिए वहां से चले गए।
बताया जा रहा है कि यह मामला पहली बार नहीं हुआ। करीब तीन दिन पहले भी संबंधित डॉक्टर जनऔषधि केंद्र पहुंचे थे और उन्होंने मरीजों को वहां से दवा नहीं देने की बात कही थी। उस समय फार्मासिस्ट ने डॉक्टर के निर्देश को मानने से इनकार करते हुए कहा था कि प्राचार्य डॉ. गीता जैन की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई डॉक्टर जनऔषधि केंद्र की दवा लेने से मरीजों को रोकता है तो इसकी तत्काल शिकायत की जाए।
इसके बाद शुक्रवार को कुछ डॉक्टरों की ओर से एक पीजी डॉक्टर को जनऔषधि केंद्र भेजे जाने की बात सामने आई। आरोप है कि पीजी डॉक्टर ने भी मरीजों को जनऔषधि केंद्र से दवा न देने के लिए कहा। इस घटनाक्रम के बाद अस्पताल में मरीजों को लिखी जाने वाली दवाओं और जनऔषधि केंद्र पर उपलब्ध सस्ती दवाओं को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामले में दवाओं की कीमत को लेकर भी चर्चा है। जानकारी के अनुसार, एक सामान्य सॉल्ट की दवा जनऔषधि केंद्र पर करीब 46 रुपये में उपलब्ध बताई जा रही है, जबकि बाहर मेडिकल स्टोर पर इसी दवा की कीमत करीब 200 से 250 रुपये तक बताई गई है। ऐसे में जनऔषधि केंद्र पर कम कीमत में दवा उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को वहां से दवा लेने से रोकने के कथित निर्देशों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रविंद्र सिंह बिष्ट ने मामले को संज्ञान में लेने की बात कही है। उन्होंने कहा कि यदि कोई डॉक्टर मरीजों को जनऔषधि केंद्र की दवा लेने से रोक रहा है तो यह बिल्कुल गलत है और मामले की जांच कराई जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि डॉक्टरों को बाहर की दवाएं नहीं लिखने के निर्देश दिए गए हैं।
फिलहाल अस्पताल प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित डॉक्टर ने वास्तव में मरीजों को जनऔषधि केंद्र से दवा लेने से रोकने के निर्देश दिए थे या नहीं। वहीं, इस पूरे मामले ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था और डॉक्टरों की भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
#DehradunNews #DoonHospital #JanAushadhiKendra #UttarakhandNews #HealthNews #Dehradun #JanAushadhi #UttarakhandHealth