
बाहर कबाड़ का ढेर, अंदर बन रहीं थीं गोलियां... मोतिहारी पुलिस ने किया 5 साल पुराने खेल का पर्दाफाश!
बापू की कर्मभूमि मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) से एक बेहद सनसनीखेज खबर सामने आई है। जिले के इतिहास में पहली बार पुलिस ने एक ऐसी अवैध कारतूस (गोलियां) बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है, जो पिछले 5 सालों से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रही थी।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि मौत का सामान बनाने वाली यह फैक्ट्री एक कबाड़ के कारोबार की आड़ में बेखौफ चल रही थी!
🔹इस बड़ी कार्रवाई की मुख्य बातें:
📍 कहाँ हुई छापेमारी? जिला पुलिस की स्पेशल टीम ने चकिया, मधुबन, गढ़हिया और फेनहारा थाना क्षेत्रों में एक साथ दबिश दी।
मास्टरमाइंड गिरफ्तार: कबाड़ की आड़ में इस काले धंधे को चलाने वाला मुख्य सरगना श्रीकांत (मड़पा निवासी) अब पुलिस की गिरफ्त में है। इससे कई गहरे राज खुले हैं।
कहाँ तक फैला है नेटवर्क? इस खतरनाक गिरोह के तार सिर्फ मोतिहारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मुजफ्फरपुर, पश्चिमी चंपारण (बेतिया) और 115 किमी लंबी खुली भारत-नेपाल सीमा तक जुड़े हुए हैं।
5 साल का इतिहास: साल 2020 से अब तक जिले में 5 मिनी गन फैक्ट्रियां पकड़ी जा चुकी हैं, लेकिन अब कारतूस की फैक्ट्री का मिलना अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस का बहुत बड़ा सबूत है।
पुलिस का एक्शन:
पूर्वी चंपारण के पुलिस अधीक्षक (SP) स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ों में मट्ठा डालने की तैयारी चल रही है। पुलिस गहराई से जांच कर रही है कि इन हथियारों का असली खरीदार कौन था।
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क्या नेपाल बॉर्डर की खुली सीमा के कारण तस्करों और अपराधियों को ऐसा दुस्साहस करने का मौका मिल रहा है? कमेंट बॉक्स में अपनी बेबाक राय जरूर दें!
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