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🚀उत्तराखंड बना उत्तर भारत का पहला राज्य: ग्रामीण महिला उद्यमियों को 'रोजगार प्रदाता' बनाने के लिए शुरू हुआ 'भुली' (BHULI) कार्यक्रम! 👩‍💼🏔️ देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 'राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' के अंतर्गत 'Business & Handholding Unit for Livelihood Incubation' (BHULI) यानी ‘भुली’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य की स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिला उद्यमियों को कुशल व्यवसायी बनाना है। 📋 ‘भुली’ (BHULI) कार्यक्रम की मुख्य बातें: उद्देश्य: महिला उद्यमियों के पारंपरिक व्यवसायों को एक मजबूत कॉर्पोरेट और व्यावसायिक ढांचा प्रदान करना ताकि वे 'रोजगार ढूंढने वाली' के बजाय 'रोजगार देने वाली' बन सकें। तकनीकी सहयोग: यह कार्यक्रम आईआईएम (IIM) काशीपुर के तकनीकी सहयोग (FIED टीम) से संचालित किया जाएगा। अवधि: यह एक 18 महीने का इन्क्यूबेशन कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य उद्यमियों के लाभ में न्यूनतम 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि करना है। 💰 वित्तीय सहायता और चयन प्रक्रिया: योजना के तहत कुल 150 उद्यमियों का चयन तीन श्रेणियों (व्यक्तिगत, समूह और बड़े उद्यम) में किया जाएगा: अनुदान (Grant): प्रत्येक श्रेणी के 6 सर्वश्रेष्ठ उद्यमियों (कुल 18) को प्रति उद्यम अधिकतम 15 लाख रुपये तक का अनुदान मिलेगा। ब्याज मुक्त ऋण: शेष 132 उद्यमियों को औसत 4 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण (Interest-free Loan) उपलब्ध कराया जाएगा। अन्य सुविधाएं: सभी आवेदकों को कौशल प्रशिक्षण और मार्गदर्शन (Mentorship) प्रदान किया जाएगा। आवेदन: इच्छुक महिला उद्यमी IIM काशीपुर FIED की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं। 🏛️ सरकार की दूरगामी सोच: विस्तार: ग्राम्य विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी ने कहा कि इसे 150 उद्यमियों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि राज्य स्तर पर इसका विस्तार किया जाएगा। नई पहल: राज्य सरकार स्कूली बच्चों और पुलिस कर्मियों की ड्रेस का निर्माण स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से करवाने की दिशा में पहले ही पहल कर चुकी है। समेकित मॉडल: सचिव ग्राम्य विकास धीराज सिंह गब्र्याल ने ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित समेकित मॉडलों को अपनाने का आह्वान किया है। यह कार्यक्रम उत्तराखंड की मातृशक्ति के सपनों को पंख देने का एक बड़ा अभियान है। आईआईएम काशीपुर का प्रबंधन कौशल और राज्य सरकार का सहयोग मिलकर उत्तराखंड के ग्रामीण उत्पादों को न केवल राष्ट्रीय बल्कि वैश्विक पहचान दिलाने में भी सक्षम सिद्ध होगा। 💬 क्या आप मानते हैं कि इस प्रकार के इन्क्यूबेशन कार्यक्रम उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों में पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में गेम-चेंजर साबित होंगे? 🔄 #BHULI #UttarakhandGovt #WomenEntrepreneurship #RuralDevelopment #IIMKashipur #ViksitUttarakhand #SHG #AtmanirbharNari #DehradunNews #DevbhoomiUpdates #SkillIndia #LivelihoodMission #BreakingNews #Empowerment #LocalToGlobal

Uttarakhand, India | Jul 15, 2026

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धारचूला 
शिक्षकों ने दिया ज्ञापन।

नदीम परवेज़ धारचूला 

स्लग: टीईटी से छूट और पुरानी पेंशन की मांग, शिक्षकों ने सौंपा ज्ञापन

धारचूला। उत्तरांचल स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन, विकासखंड धारचुला ने मंगलवार को शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड सरकार के नाम उपजिलाधिकारी (एसडीएम) धारचुला के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में टीईटी की अनिवार्यता से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इससे मुक्त रखने, आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को इसके प्रावधानों से छूट देने तथा पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने की मांग उठाई गई।

शिक्षक संगठन ने ज्ञापन में कहा कि उच्चतम न्यायालय के 1 नवंबर 2025 के निर्णय के अनुरूप वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। साथ ही आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी इसके प्रावधानों से छूट प्रदान की जाए। संगठन ने पुरानी पेंशन योजना को पुनः लागू करने की भी मांग की।

ज्ञापन सौंपने के बाद संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट नहीं दी गई और पुरानी पेंशन योजना बहाल नहीं की गई, तो शिक्षक चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर शिक्षक सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी तैयारी संगठन ने कर ली है।

इस दौरान संगठन के अध्यक्ष हीरा सिंह बम, मंत्री महावीर सिंह धामी, कोषाध्यक्ष आभा फगलियाल, कमला जोशी, तुलसी जोशी, फरहत तबस्सुम, जसोदा नबियाल टी एस गरबियाल, जीवन बिस्ट, निधी वरमा, जशोदा रोतेला पुष्पा  गुरगँ, पुष्पा सहित अनेक शिक्षक उपस्थित रहे।

धारचूला शिक्षकों ने दिया ज्ञापन। नदीम परवेज़ धारचूला स्लग: टीईटी से छूट और पुरानी पेंशन की मांग, शिक्षकों ने सौंपा ज्ञापन धारचूला। उत्तरांचल स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन, विकासखंड धारचुला ने मंगलवार को शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड सरकार के नाम उपजिलाधिकारी (एसडीएम) धारचुला के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में टीईटी की अनिवार्यता से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इससे मुक्त रखने, आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को इसके प्रावधानों से छूट देने तथा पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने की मांग उठाई गई। शिक्षक संगठन ने ज्ञापन में कहा कि उच्चतम न्यायालय के 1 नवंबर 2025 के निर्णय के अनुरूप वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। साथ ही आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी इसके प्रावधानों से छूट प्रदान की जाए। संगठन ने पुरानी पेंशन योजना को पुनः लागू करने की भी मांग की। ज्ञापन सौंपने के बाद संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट नहीं दी गई और पुरानी पेंशन योजना बहाल नहीं की गई, तो शिक्षक चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर शिक्षक सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी तैयारी संगठन ने कर ली है। इस दौरान संगठन के अध्यक्ष हीरा सिंह बम, मंत्री महावीर सिंह धामी, कोषाध्यक्ष आभा फगलियाल, कमला जोशी, तुलसी जोशी, फरहत तबस्सुम, जसोदा नबियाल टी एस गरबियाल, जीवन बिस्ट, निधी वरमा, जशोदा रोतेला पुष्पा गुरगँ, पुष्पा सहित अनेक शिक्षक उपस्थित रहे।

Dharchula, Pithoragarh | Jul 10, 2026

सिंचाई विभाग संज्ञान लें।

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पुस्तक विमोचन जिला अधिकारी पिथोरागढ़

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