
देहरादून: सृष्टि कंडारी सुसाइड प्रकरण में सास की जमानत हुई खारिज! कोर्ट में रिटायर्ड लेक्चरर सास प्रवीणा खत्री ने दहेज की बात से किया इनकार लेकिन कोर्ट ने मामले की गंभीरता देखते हुए जमानत की खारिज! एक उच्च शिक्षित,करोड़पति परिवार के शब्दों के तीर थे गहरे! ताने, अपशब्द , अभद्र व्यवहार और बिखर गया परिवार।
शब्द ही जीवन बनाते हैं, शब्द ही जीवन मिटाते हैं । उच्च शिक्षित परिवार ने सिर्फ किताबी शब्द पढ़े थे , विज्ञान , गणित, हिंदी,अंग्रेजी की पुस्तकें पढ़ी थी पर व्यवहार के शब्दों में शायद वो अनपढ़ रह गए । शायद यही वजह थी जिसकी वजह से शब्दों के तीर ऐसे चुभे कि मौत का कारण बन गए।
जिंदगी में इंसान न कुछ लेकर आता है ,न लेकर जाता है । ये सब जानते हुए भी पढ़े लिखे लोग ही अपने परिवार के लोगों से ऐसा व्यवहार करते हैं जिनकी वजह से आज कई परिवार यूं ही खत्म होते जा रहे हैं । मीठे बोल: जिंदगी की दवा है! और कड़वे बोल: जहर!
उत्तराखंड के देहरादून जिले की शिक्षिका सृष्टि कंडारी की आत्महत्या से जुड़े मामले में उनकी सास प्रवीणा खत्री को अदालत से एक बार फिर राहत नहीं मिली। प्रभारी सत्र न्यायाधीश महेश चंद्र कौशिक की अदालत ने प्रवीणा खत्री की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने मामले की गंभीरता, सामने आए आरोपों और जारी विवेचना को देखते हुए गिरफ्तारी से पहले जमानत देने का उचित आधार नहीं पाया। इससे पहले भी प्रवीणा खत्री की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका पर अदालत राहत देने से इनकार कर चुकी है। अब 10 अगस्त को हुई सुनवाई के बाद उनकी जमानत की उम्मीद एक बार फिर टूट गई।
उत्तराखंड के देहरादून जिले की शिक्षिका सृष्टि कंडारी की आत्महत्या से जुड़े मामले में उनकी सास प्रवीणा खत्री को अदालत से एक बार फिर राहत नहीं मिली। प्रभारी सत्र न्यायाधीश महेश चंद्र कौशिक की अदालत ने प्रवीणा खत्री की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने मामले की गंभीरता, सामने आए आरोपों और जारी विवेचना को देखते हुए गिरफ्तारी से पहले जमानत देने का उचित आधार नहीं पाया। इससे पहले भी प्रवीणा खत्री की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका पर अदालत राहत देने से इनकार कर चुकी है। अब 10 अगस्त को हुई सुनवाई के बाद उनकी जमानत की उम्मीद एक बार फिर टूट गई।
अदालत में बचाव पक्ष ने प्रवीणा खत्री के खिलाफ दर्ज मुकदमे को गलत तथ्यों पर आधारित बताया। पक्ष की ओर से कहा गया कि प्रवीणा की उम्र 66 वर्ष से अधिक है और वह शिक्षा विभाग में लेक्चरर के पद से सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि सृष्टि का विवाह नवंबर 2025 में प्रवीणा के बेटे सौरभ खत्री से हुआ था। परिवार ने दहेज के लिए सृष्टि को प्रताड़ित करने के आरोपों से इनकार किया। याचिका में प्रवीणा के पति मनोहर खत्री की गंभीर बीमारी का भी हवाला दिया गया। बताया गया कि वह ब्रेन कैंसर की चौथी स्टेज से जूझ रहे थे और इलाज के दौरान उनकी हालत लगातार बिगड़ती रही। 26 जुलाई 2026 को उनका निधन हो गया था। इसके कुछ दिन बाद 29 जुलाई को सृष्टि की मौत उसके कमरे में फांसी लगाने से होने की बात सामने आई।
अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए सृष्टि को दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया। अभियोजन के मुताबिक, सृष्टि ने मौत से पहले अपनी मां को व्हाट्सऐप पर करीब छह मिनट का वीडियो भेजा था। बताया गया कि इस वीडियो में सृष्टि ने अपने पति, सास और ननद पर लंबे समय से मानसिक प्रताड़ना करने और उसे अपशब्द कहने के आरोप लगाए थे। जांच के दौरान सृष्टि की बहन रुचि, जीजा पंकज सिंह राणा और भाई देवांशु उर्फ गुंजन खंडूरी के बयान भी दर्ज किए गए। अभियोजन के अनुसार, इन बयानों में भी सृष्टि को दहेज को लेकर परेशान किए जाने और ताने दिए जाने की बात सामने आई है।
अदालत ने मामले की परिस्थितियों को गंभीर मानते हुए कहा कि सृष्टि की मौत शादी के सात वर्ष के भीतर असामान्य परिस्थितियों में हुई। कोर्ट ने दहेज मृत्यु से संबंधित आरोपों और केस में सामने आए तथ्यों को ध्यान में रखा। अदालत ने यह भी माना कि मामले की विवेचना अभी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में उपलब्ध रिकॉर्ड और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए प्रवीणा खत्री को अग्रिम जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं बनता। इसी आधार पर अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।