सूखे कचरे को रिसाइक्लिंग के लिए उद्योगों में भेजा जाएगा, जबकि गीले कचरे से जैविक खाद बनाई जाएगी। निगम का कहना है कि इस नई व्यवस्था से केदारपुर में वर्षों से जमा करीब 13 लाख टन कचरे का पहाड़ धीरे-धीरे खत्म होगा और शहर को स्वच्छ, प्रदूषणमुक्त बनाने के साथ हर साल करीब 1.5 करोड़ रुपये की बिजली लागत की भी बचत होगी।