
परमहंस दयाल समाधि स्मृति समारोह एवं पदयात्रा-2026: 8-9 जुलाई को होगा दो दिवसीय आध्यात्मिक आयोजन, हजारों श्रद्धालु होंगे शामिल...
छपरा, 7 जुलाई : सारण की पावन धरती पर जन्मे प्रेमाद्वैत दर्शन के प्रवर्तक एवं विश्ववंद्य संत परमहंस दयाल श्री श्री 1008 अद्वैतानंद जी महाराज की पावन समाधि स्मृति में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला 'परमहंस दयाल समाधि स्मृति समारोह एवं पदयात्रा-2026' इस वर्ष 8 एवं 9 जुलाई को आयोजित होगा. इस बार यह आयोजन अपने आठवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है.
ब्रह्म विद्यालय एवं आश्रम, रौजा में आयोजित प्रेस वार्ता में समारोह के आयोजक महात्मा व्यासानंद जी ने बताया कि परमहंस दयाल जी महाराज का अवतरण सारण की पावन भूमि पर हुआ था. उनका पालन-पोषण, गुरु-मिलन एवं ज्ञान-प्राप्ति भी छपरा से ही जुड़ी रही. छपरा के लोगों को उनके जीवन, कृतित्व और सार्वभौमिक प्रेमाद्वैत दर्शन से परिचित कराने के उद्देश्य से वर्ष 2019 में उनके समाधि शताब्दी वर्ष से इस आयोजन की शुरुआत की गई थी, जो अब एक वार्षिक परंपरा बन चुकी है.
आयोजकों के अनुसार 8 जुलाई को सुबह 8 बजे से राजेंद्र स्टेडियम, छपरा में भजन-कीर्तन का आयोजन होगा. इसके बाद सुबह 10 बजे से प्रवचन एवं व्याख्यानमाला आयोजित की जाएगी, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए संन्यासी, विद्वान एवं विशिष्ट अतिथि परमहंस दयाल जी महाराज के जीवन, कार्य, सिद्धांतों और प्रेमाद्वैत दर्शन पर अपने विचार रखेंगे. श्रद्धालुओं के लिए भोजन-प्रसाद की भी व्यवस्था रहेगी.
9 जुलाई को प्रातः 5:30 बजे ब्रह्म विद्यालय एवं आश्रम, नंदपुर (मांझी) से स्वामी श्री सत्यानंद जी महाराज 'परमहंस' के सान्निध्य में विशाल पदयात्रा प्रारंभ होगी. नंदपुर परमहंस दयाल जी महाराज का ननिहाल एवं जन्मस्थली माना जाता है.
पदयात्रा कोपा, देवरिया, टेकनिवास, ब्रह्मपुल और दहियावां होते हुए छपरा के परमहंस दयाल जन्मभूमि मंदिर पहुंचेगी, जहां श्रद्धालु माथा टेकेंगे. इसके बाद यात्रा राजेंद्र स्टेडियम, थाना चौक, कटहरी बाग, गांधी चौक और भिखारी चौक होते हुए ब्रह्म विद्यालय एवं आश्रम, रौजा में सम्पन्न होगी. यात्रा के दौरान स्वयं स्वामी श्री सत्यानंद जी महाराज 'परमहंस' श्रद्धालुओं का नेतृत्व करेंगे.
हर वर्ष इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा और भक्त शामिल होते हैं. नंदपुर एवं रौजा स्थित आश्रमों में श्रद्धालुओं के लिए विशाल पंडाल, भोजन-प्रसाद तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं व्यापक स्तर पर की गई हैं.
प्रेस वार्ता में महात्मा ओंकारानंद जी, महात्मा स्रष्टानंद जी एवं महात्मा निर्मलप्रकाशानंद जी भी उपस्थित रहे. उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से समारोह एवं पदयात्रा में भाग लेकर इस आध्यात्मिक परंपरा का साक्षी बनने की अपील की.
परमहंस दयाल जी महाराज के जीवन, उनके प्रेम, समरसता और आध्यात्मिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित यह दो दिवसीय समारोह हर वर्ष श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक सहभागिता का अनूठा उदाहरण बनता जा रहा है.
Chapra, Saran | Jul 7, 2026