
अजब, गजब का खेल, जनता का पईसा कहा गेल, जनता के करोड़ों रुपए की बर्बादी-- नवनीत कुo झा
शिवहर : बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भारी सुरक्षा और तामझाम के बीच करोड़ो रुपए लागत से बनी बेलवा डैम का 'उद्घाटन' करने शिवहर बेलवा पहुंचे। जिला प्रशासन मुख्यमंत्री के स्वागत में प्रशासनिक तैयारियों में जुटा रहा, आनन-फानन में वीआईपी लोगों के लिए जो रास्ता दशकों से नहीं बन पाया वह रास्ता तैयार कर चकाचक कर दिया गया। माने बेलवा का कायाकल्प हो गया। आनन फानन में बनाए गए लिंक लाइन कितना टिकाऊ होगा। ओ तो एक बरसात में पता चल जाएगा।
👉राजद नेता शिवहर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी नवनीत कुमार झा ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के शिवहर आगमन को लेकर कहा की
*अजब, गजब का खेल, जनता का पईसा कहा गेल, जनता के करोड़ों रुपए की बर्बादी*
(सरकारी खजाने से लाखों रुपये पानी की तरह बहाए गए)
नवनीत झा ने कहा कि जिस पैसे का इस्तेमाल स्थानीय विकास या बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए हो सकता था वह पैसा मुख्यमंत्री के आगमन पर पानी की तरह बहाए गए। रातों-रात हेलीपैड से लेकर रोड रास्ता और बिजली बत्ती जगमगा दिया गया। यह कितना टिकाऊ है वह तो समय बताएगा। लेकिन फिलहाल जनता जानना चाहती है,
जब उद्घाटन हो चुका था, तो दोबारा क्यों?
जनता की याददाश्त इतनी कमजोर नहीं है। अभी ज्यादा दिन नहीं बीते, 27 फरवरी 2024 को बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना में बैठकर, एक क्लिक के जरिए पूरे डिजिटल तामझाम के साथ इसी बेलवा डैम (हेड रेगुलेटर) का आधिकारिक उद्घाटन किया था।
तो सवाल उठता है कि
एक ही सरकारी इमारत या डैम का कितनी बार उद्घाटन किया जाएगा?
क्या सरकार बदलने के साथ ही पुराने उद्घाटन अमान्य हो जाते हैं।
फरवरी 2024 में जब डिजिटल तरीके से उद्घाटन हुआ था, तो क्या वह सिर्फ एक चुनावी स्टंट या दिखावा था।
एक तरफ बिहार बाढ़ और सुखाड़ की विभीषिका झेलता है, युवाओं को रोजगार के लिए बाहर जाना पड़ता है, वहीं दूसरी तरफ सरकारें सिर्फ श्रेय लेने की होड़ में सरकारी खजाने को फूंक रही हैं। जब डैम का ढांचा पहले से बनकर तैयार है और जनता को समर्पित हो चुका है, तो अब नए मुख्यमंत्री के हाथों दोबारा फीता कटवाने के लिए हेलीपैड बनाने, सुरक्षा बल तैनात करने और इस पूरे राजनीतिक इवेंट पर करोड़ो रुपये बर्बाद करने का क्या औचित्य था। और तो और बात करें इतने साल बीत जाने के बाद भी नाला उगाही का काम पूर्ण नहीं हुआ है। दो बार उद्घाटन और फीता कट गया।
क्या इस पैसे का इस्तेमाल शिवहर के स्थानीय विकास या बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए नहीं हो सकता था? शिवहर जिले में इन दिनों लोग बिजली, पानी, रोड रास्ता की मार झेल रहे हैं। थोड़ा सा बारिश क्या हो जाता है रोड रास्ता का नारकीय स्थिति बन जाता है। तो वहीं बिजली कट से लोग परेशान हैं। कई ऐसे गांव वार्ड हैं जहां पर नल जल का पानी नहीं होने से पानी के लिए लोग लालायीत हैं। वहीं लोगों की सैलरी या पेंशन समय से नहीं मिल पा रहा है।
👉इन तमाम चीजों पर,
जनता पूछ रही है सवाल!
क्या बिहार की जनता के टैक्स का पैसा सिर्फ इसलिए है कि हर नया नेता आकर एक ही परियोजना पर अपने नाम का पत्थर लगवाता रहे? पहले रिमोट से उद्घाटन और अब जमीनी तौर पर हेलीपैड लैंड कराकर उद्घाटन—यह 'डबल उद्घाटन' का खेल।
प्रशासन भले ही इसे 'नया चरण' या 'लिंक चैनल' का काम बताकर दबाने की कोशिश करे, लेकिन हकीकत यही है कि जनता की जेब पर डाका डालकर राजनीतिक रोटियां सेंकी जा रही हैं।