#जय #माता #दी #जी .....
#माँ चिंतपूर्णी जी के प्राकृतिक पिण्डी स्वरूप के प्रात: काल श्रृंगार के अलौकिक दर्शन....
#छिन्नमस्तके अम्बिके,तेरी कीर्ति अपार।
नमन तुम्हें शतबार,कर सभी का उद्धार।।
-#ऐसी #भक्तवत्सल #भक्तों की #सभी #चिंताओं को #हरने वाली #माँ #छिन्नमस्तिका #चिंतपूर्णी माँ की #कृपा #सब #भक्तजनों पर #बनी रहे..जय माता दी जी...